नयी दिल्ली, 18 सितंबर (वार्ता) वैश्विक साख निर्धारक एजेंसी मूडीज रेटिंग्स ने मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि का अनुमान छह प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया है। मूडीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। उसने उम्मीद जताई कि दूसरी जी20 अर्थव्यवस्थाओं और समान साख वाले उभरते बाजारों की तुलना में तेजी से आगे बढ़ता रहेगा। हालांकि, उसने चेतावनी दी कि ईंधन और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी से अर्थव्यवस्था की गति अनुमान से कम रह सकती है।
उसका कहना कि ईंधन की लागत लंबे समय तक ऊंची बनी रही तो महंगाई और घरेलू खपत पर दबाव पड़ सकता है। इससे सकल आर्थिक विकास पर भी असर पड़ सकता है। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में जीडीपी में साल-दर-साल 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। उसके बाद मूडीज ने अपने पिछले अनुमान में सुधार किया है।
‘अल नीनो’ के संभावित असर पर के बारे में मूडीज का मानना है कि इससे खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ सकते हैं, और महंगाई का अतिरिक्त दबाव बन सकता है। खाद्य और ऊर्जा की अधिक लागत का असर उपभोक्ताओं के खर्च और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। वित्तीय मोर्चे पर एजेंसी ने कहा है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के आर्थिक असर पर सरकार की प्रतिक्रिया अब तक काफी सीमित रही है। वैश्विक ऊर्जा कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से सरकार सब्सिडी अन्य सहायता योजनाओं की जरूरत बढ़ सकती है। साथ ही, एजेंसी ने कहा कि रक्षा और बुनियादी ढांचे पर अधिक खर्च से वित्तीय मजबूती का काम और मुश्किल हो सकता है।

