नयी दिल्ली, 17 सितंबर (वार्ता) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि भारत को खनन एवं धातु क्षेत्र में संसाधन आधारित लाभ से आगे बढ़कर प्रौद्योगिकी आधारित प्रतिस्पर्धात्मक लाभ हासिल करना होगा और इसके लिए पूरी मूल्य श्रृंखला में प्रौद्योगिकी का एकीकरण करना आवश्यक है।
डॉ.जितेंद्र सिंह ने यहां एफआईसीसीआई के खनन एवं धातु उद्योग में डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन और प्रौद्योगिकी एकीकरण पर आयोजित तीसरे सम्मेलन को संबोधित करते हुए शुक्रवार को कहा कि प्रौद्योगिकी भूवैज्ञानिक अन्वेषण और खनन से लेकर प्रसंस्करण, रसद, पुनर्चक्रण और विनिर्माण तक पूरे क्षेत्र में बदलाव ला सकती है।
उन्होंने कहा कि अयस्क की घटती गुणवत्ता, अधिक गहराई और जटिल भंडार, ऊर्जा एवं रसद लागत, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला तथा कार्बन उत्सर्जन कम करने की जरूरतों के बीच प्रौद्योगिकी को रणनीतिक साधन के रूप में अपनाना आवश्यक है। उनका कहना था कि डिजिटल और प्रक्रिया प्रौद्योगिकियों से संसाधनों के बेहतर उपयोग होंगे, ऊर्जा एवं जल की खपत में कमी आएगी तथा भारतीय खनिजों और धातुओं की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
डॉ. सिंह ने एक लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान, विकास एवं नवाचार योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे निजी क्षेत्र की अनुसंधान एवं विकास तथा गहन प्रौद्योगिकी नवाचार में भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इससे भारत को प्रोटोटाइप और पेटेंट मतलब तकनीकी खोजने और उसका पेटेंट करने से आगे बढ़कर प्रौद्योगिकियों का व्यवसायीकरण और बड़े पैमाने पर उत्पादन सुनिश्चित करना होगा।
उन्होंने खनन एवं धातु उद्योग, अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप और प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्रों के बीच सहयोग बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि तकनीकी समाधानों का आकलन इस आधार पर होना चाहिए कि वे प्रमाणित होकर औद्योगिक स्तर पर कितने प्रभावी ढंग से अपनाए और व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल किए जाते हैं।
