शिवसेना विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उठाए बड़े सवाल, पूछा- क्या अयोग्यता का सामना कर रहे विधायकों का बहुमत वैध पैमाना है?

नई दिल्ली,  शिवसेना की असली राजनीतिक विरासत और चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक अहम सवाल उठाया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने एकनाथ शिंदे गुट के वकील से पूछा कि क्या विधायी बहुमत (लेजिस्लेटिव मेजॉरिटी) को किसी राजनीतिक दल का स्वामित्व तय करने का एकमात्र वैध पैमाना माना जा सकता है, विशेष रूप से तब जब उन विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही खुद लंबित हो।

उद्धव ठाकरे गुट की याचिका पर चल रही है सुनवाई, चुनाव आयोग के फैसले और स्पीकर के निर्णय को दी गई है चुनौती

सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई उद्धव ठाकरे गुट की उस चुनौती पर हो रही है, जिसमें निर्वाचन आयोग द्वारा एकनाथ शिंदे के धड़े को ‘असली शिवसेना’ मानते हुए पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए जाने को चुनौती दी गई है। इसके साथ ही, महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर के जनवरी 2024 के उस फैसले को भी परखा जा रहा है जिसके तहत किसी भी गुट के विधायकों को अयोग्य ठहराने से इनकार कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान शिंदे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने अपनी अंतिम दलीलें पेश कीं।

कोर्ट ने सुझाए अन्य विकल्प, कहा- दोनों गुटों को अलग-अलग प्रतीक चिन्ह देकर चुनाव लड़ने का दिया जा सकता था निर्देश

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि यदि सभी परीक्षणों में असमंजस था, तो चुनाव आयोग के पास यह विकल्प भी था कि वह दोनों गुटों को आरक्षित चिन्ह देने से इनकार कर देता और उन्हें अपनी ताकत पर अलग-अलग चुनाव लड़ने का निर्देश देता, न कि बालासाहेब ठाकरे की विरासत का दावा करने देता। इस हाई-प्रोफाइल राजनीतिक और कानूनी मामले की सुनवाई गुरुवार को भी लगातार जारी रहेगी, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।

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