इंदौर: सिंधु सभ्यता की हजारों वर्ष पुरानी कला, संस्कृति और परंपराओं को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए इंदौर में प्रदेश का पहला सिंधु कला केंद्र आकार लेगा. ‘सिंधु सभ्यता से संस्कृति तक’ की संकल्पना पर आधारित केंद्र का भूमिपूजन बुधवार को हुआ. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समारोह में शामिल हुए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसे नगरों की सुव्यवस्थित सड़कें, जल निकासी व्यवस्था, पक्की ईंटों से बने भवन और व्यापारिक गतिविधियां उस दौर के उन्नत नगर नियोजन और वैज्ञानिक सोच को दर्शाती हैं. सिंधु सभ्यता के लोग कृषि, पशुपालन, शिल्प, धातु-कर्म और व्यापार में भी दक्ष थे. मुहरों, मूर्तियों, आभूषणों और मृद्भांडों से उस समय की कला और जीवनशैली की जानकारी मिलती है. समारोह में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार, विधायक मालिनी गौड़ सहित सिंधु हेरिटेज ट्रस्ट के पदाधिकारी, ट्रस्टी, समाजजन और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे. कार्यक्रम की अध्यक्षता लखी ग्रुप के चेयरमैन दिलीप लखी ने की. उन्होंने कहा कि सिंधु कला केंद्र केवल एक भवन नहीं, बल्कि हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति और इतिहास का जीवंत प्रतीक होगा. केंद्र में सिंधु सभ्यता के नगर नियोजन, जल प्रबंधन, व्यापार, शिल्पकला, मुहरों, आभूषणों और दैनिक जीवन से जुड़े पहलुओं को आधुनिक तकनीक और दृश्य माध्यमों के जरिए प्रदर्शित किया जाएगा.
सांस्कृतिक धरोहर के रूप में प्रस्तुत करेंगे
सांसद और सिंधु हेरिटेज ट्रस्ट के अध्यक्ष शंकर लालवानी ने कहा कि केंद्र की परिकल्पना सिंधु सभ्यता की कला, संस्कृति और परंपराओं को एक स्थान पर संरक्षित और प्रदर्शित करने के उद्देश्य से की गई है. यहां प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से विरासत को आधुनिक स्वरूप में प्रस्तुत किया जाएगा. उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग और सहभागिता से केंद्र को व्यापक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित किया जाएगा.
