रियाद, 16 सितंबर (वार्ता) सऊदी अरब की वायु रक्षा प्रणाली ने मक्का के दक्षिण हिस्से में एक ड्रोन को पवित्र शहर के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही मार गिराने में सफलता हासिल की है।
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने आरोप लगाया कि यमन के हूती विद्रोहियों ने इस ड्रोन को इस्लाम के सबसे पवित्र शहर की ओर भेजा था।
गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि दोनों पवित्र मस्जिदों और जायरीनों की सुरक्षा हमारे लिए ‘लाल रेखा’ है। उन्होंने चेतावनी दी कि सऊदी सेना आगे के हमलों को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएगी।
इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का के बाहरी इलाके को निशाना बनाकर किए गये ड्रोन हमले की क्षेत्रीय और इस्लामी संगठनों ने निंदा की है। इस घटना से क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष को लेकर चिंता भी बढ़ गई है।
श्री अल-मलिकी ने कहा कि ड्रोन को मक्का के पास मार गिराया गया। उन्होंने इसे लाखों मुसलमानों की भावनाओं को जानबूझकर भड़काने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा, ”यह शत्रुतापूर्ण कोशिश चरमपंथी आतंकवादी हूती मिलिशिया के उल्लंघनों के रिकॉर्ड में एक काला धब्बा बनी रहेगी।” उन्होंने कहा कि सऊदी अरब ”जरूरी और रोकथाम वाले कदम” उठाएगा।
हूतियों ने हालांकि मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया है। उनके सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि उनके हमले सऊदी अरब की तेल सुविधाओं और सैन्य ठिकानों पर किए गए थे, जो ‘पवित्र स्थानों से बहुत दूर’ हैं। करीब एक दशक में मक्का को निशाना बनाने की हूतियों की यह पहली रिपोर्ट की गई कोशिश है। वर्ष 2017 में पवित्र शहर की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को भी सऊदी सेना ने रोककर नष्ट कर दिया था।
इस हमले की 57 सदस्य देशों वाले संगठन इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) ने निंदा की है। संगठन ने कहा कि इस तरह के हमले ‘पवित्र स्थलों और मस्जिदों की पवित्रता का उल्लंघन करते हैं’ और आम लोगों में डर पैदा करते हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इस घटना की निंदा की। उन्होंने इसे ‘कायरतापूर्ण और घृणित’ कृत्य बताया और सऊदी अरब के प्रति पाकिस्तान के समर्थन को दोहराया।
ड्रोन को रोके जाने की यह घटना हूतियों और सऊदी अरब के बीच लड़ाई में तेज बढ़ोतरी के बीच सामने आई है। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, हूतियों ने इस सप्ताह की शुरुआत में सऊदी अरब के कई शहरों की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन भेजे थे। इनमें खमिस मुशैत, अबहा और ताइफ शामिल हैं। इन हमलों में 13 नागरिक घायल हुए।
हूतियों ने रविवार को सऊदी अरब के एक सैन्य ठिकाने पर हमले की जिम्मेदारी लेने का भी दावा किया। विद्रोही संगठन के अनुसार, इसके जवाब में सऊदी सेना ने यमन के हूतियों के कब्जे वाले इलाकों पर हवाई हमले किए हैं। हूतियों ने पिछले कुछ हफ्तों में यमन की सऊदी समर्थित सरकार के खिलाफ अपने हमले भी तेज कर दिए हैं। उन्होंने अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र का विस्तार किया है और लाल सागर में जहाजों के आने-जाने वाले मार्गों पर दबाव बढ़ाया है।
यह तनाव ऐसे समय बढ़ा है, जब व्यापक अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति के मार्ग प्रभावित हो रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर तेल की आपूर्ति के लिए प्रमुख तनाव वाले क्षेत्र बनकर उभरे हैं। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच तेल की कीमतें 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संघर्ष के संभावित असर को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
