कान्हा टाइगर रिजर्व में हाथियों के पुनर्यौवन शिविर का शुभारंभ

बालाघाट:वन एवं वन्यजीव संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले विभागीय हाथियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कान्हा टाइगर रिजर्व द्वारा हाथी पुनर्यौवन (रिजुविनेशन) शिविर का शुभारंभ मंगलवार को परिक्षेत्र सुपखार में किया गया। यह विशेष शिविर 15 से 20 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है।
शिविर का शुभारंभ कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक रविन्द्र मनी त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर सीआरपीएफ मंडला के कमांडेंट आलोक यादव, उप संचालक प्रकाश कुमार वर्मा, मोहगांव प्रोजेक्ट के संभागीय प्रबंधक विनोद जाखड़ सहित समस्त सहायक संचालक, वरिष्ठ वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी, परिक्षेत्र अधिकारी एवं वन अमला मौजूद रहा।

16 विभागीय हाथी निभा रहे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
कान्हा टाइगर रिजर्व में वर्तमान में कुल 16 विभागीय हाथी हैं, जिनमें 9 नर, 6 मादा तथा एक नवजात हाथी शावक शामिल है। ये हाथी वर्षभर वन विभाग के साथ वन्यजीव संरक्षण, गश्ती, वन्यजीव अनुश्रवण और ट्रांसलोकेशन सहित विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यों में सहयोग करते हैं। मानसून के दौरान कठिन परिस्थितियों में भी इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहती है।
नियमित रूप से जिम्मेदारियां निभाने वाले हाथियों को कुछ समय के लिए कार्य से अलग रखकर उनके स्वास्थ्य एवं कल्याण पर विशेष ध्यान देने के लिए यह शिविर आयोजित किया गया है। शिविर में हाथियों को पर्याप्त विश्राम, पौष्टिक आहार तथा समूह में रहने और स्वाभाविक व्यवहार प्रदर्शित करने के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा।

स्वास्थ्य जांच के साथ मिलेगा पौष्टिक आहार
छह दिवसीय शिविर के दौरान प्रत्येक हाथी का विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। वरिष्ठ वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी एवं चिकित्सकीय दल द्वारा आवश्यक जांच के साथ रक्त, मल एवं मूत्र के नमूने लिए जाएंगे। इन्हें आवश्यक परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। साथ ही हाथियों का शारीरिक माप भी निर्धारित प्रपत्र में दर्ज किया जाएगा।
हाथियों की आवश्यकता के अनुसार उन्हें विशेष एवं पौष्टिक आहार दिया जाएगा। इसके अलावा शरीर एवं पैरों की मालिश, स्नान तथा दैनिक देखभाल के माध्यम से उन्हें आराम और शारीरिक स्फूर्ति प्रदान की जाएगी।

खेल गतिविधियों से मानसिक स्वास्थ्य पर जोर
शिविर में हाथियों को एक साथ रहने और भोजन करने का अवसर भी दिया जाएगा। दोपहर के समय महावत एवं चाराकटरों के साथ परिचयात्मक एवं खेल गतिविधियां कराई जाएंगी। इन गतिविधियों से हाथियों के सामाजिक व्यवहार को बनाए रखने के साथ उन्हें मानसिक रूप से सक्रिय एवं सहज रखने में मदद मिलेगी।
प्रतिदिन सुबह हाथियों को जंगल से शिविर स्थल पर लाया जाएगा, जहां स्नान, शरीर एवं पैरों की मालिश सहित अन्य आवश्यक देखभाल की जाएगी। दिनभर की गतिविधियों के बाद शाम को भोजन कराकर उन्हें पुनः जंगल में छोड़ा जाएगा।

महावत और चाराकटरों को भी दिया जाएगा प्रशिक्षण
पुनर्यौवन शिविर में केवल हाथियों की देखभाल ही नहीं, बल्कि उनके साथ कार्य करने वाले महावत एवं चाराकटरों की दक्षता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। वरिष्ठ महावतों द्वारा हाथियों के व्यवहार को समझने, रखरखाव, दैनिक देखभाल तथा विभिन्न परिस्थितियों में उचित निर्देश देने के संबंध में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य हाथियों और उनके साथ कार्य करने वाले कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा आपात परिस्थितियों में सुरक्षित एवं प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करना है।

16 वर्षों से जारी है परंपरा
कान्हा टाइगर रिजर्व में विभागीय हाथियों के स्वास्थ्य एवं कल्याण को प्राथमिकता देते हुए पुनर्यौवन शिविर के आयोजन की परंपरा पिछले 16 वर्षों से लगातार जारी है। यह पहल हाथियों के प्रति कान्हा टाइगर रिजर्व की संवेदनशीलता के साथ-साथ उनके वैज्ञानिक एवं समग्र प्रबंधन की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
शिविर के माध्यम से वन संरक्षण में लगातार योगदान देने वाले विभागीय हाथियों को विश्राम, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, पौष्टिक आहार और विशेष देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है। इससे हाथी कल्याण को वन्यजीव प्रबंधन का अभिन्न हिस्सा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

Next Post

खजुरी नदी से रेत कारोबार पकड़ा जोर

Wed Sep 16 , 2026
सिंगरौली : कोतवाली क्षेत्र बैढ़न के खजुरी नदी से रेत का अवैध कारोबार फिर से जोर पकड़ने लगा है। आलम यह है कि शाम ढलते ही दूसरे दिन सुबह तक धड़ल्ले के साथ आधा दर्जन से अधिक ट्रैक्टर रेत के कारोबार में चलते रहते हैं, परंतु पुलिस को यह सब […]

You May Like