हैदराबाद, केंद्र सरकार के नए नोटिफिकेशन के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा यूपीआई भुगतानों पर 0.40 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वसूला जाएगा, जो पूरे देश में 15 अक्टूबर से लागू होगा। वित्त मंत्रालय द्वारा स्पष्ट किया गया है कि आम ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि 2,000 रुपये तक के यूपीआई ट्रांजैक्शन या किसी दोस्त-रिश्तेदार को भेजे जाने वाले पर्सन-टू-पर्सन (P2P) भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
ग्राहकों के खातों से नहीं कटेगा MDR चार्ज, केवल कुछ बड़े व्यापारियों और मर्चेंट्स पर ही लागू होगा नियम
सरकार और पेमेंट एंड सेटलमेंट एक्ट की धारा 10A के तहत यह सुरक्षा दी गई है कि ग्राहकों से किसी भी प्रकार का सीधा या छिपा हुआ चार्ज नहीं लिया जाएगा। 2,000 रुपये की सीमा का मतलब यह कतई नहीं है कि 2,001 रुपये का भुगतान करने पर सामान्य ग्राहकों पर बोझ पड़ेगा। इस नए नियम के तहत MDR का भुगतान आम ग्राहक के बजाय केवल संबंधित मर्चेंट या दुकानदारों द्वारा ही बैंकों को किया जाएगा।
लेनदेन को आसान और पारदर्शी बनाने की पहल, डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने जारी किए स्पष्ट निर्देश
वित्तीय मामलों के जानकारों के अनुसार, सरकार के इस कदम का उद्देश्य डिजिटल भुगतान प्रणाली को आर्थिक रूप से अधिक टिकाऊ बनाना और मर्चेंट नेटवर्क को मजबूत करना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह शुल्क प्रणाली केवल व्यापारिक लेन-देन (P2M) के दायरे में आने वाले चुनिंदा मर्चेंट्स पर ही प्रभावी होगी, जिससे आम जनता के रोजमर्रा के छोटे-बड़े डिजिटल भुगतान बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के जारी रह सकें।

