भोपाल, मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर चल रहे फर्जी पासपोर्ट रैकेट की जांच में सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। एसटीएफ की शुरुआती जांच में सामने आया है कि रैकेट द्वारा बनवाए गए कुल 70 फर्जी पासपोर्ट्स में से 57 अकेले बौद्ध मठों के पते पर तैयार किए गए थे, जिनमें भोपाल के मठ के पते पर 40 और ग्वालियर के डबरा स्थित मठ के पते पर 17 पासपोर्ट शामिल हैं। मामले का मुख्य आरोपी रियाल चौधरी मूल रूप से बांग्लादेशी निकला है, जिसने असम के कामरूप जिले से फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए थे। इस अंतर्राष्ट्रीय और अंतर-राज्यीय नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने के लिए मध्य प्रदेश एसटीएफ की टीमें असम समेत पांच अलग-अलग राज्यों में दबिश दे रही हैं।
बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा भी रडार पर, 2021 से 2023 के बीच 25 हजार रुपये प्रति पासपोर्ट वसूलकर बनाए गए दस्तावेज
एसटीएफ के खुलासे के अनुसार, बौद्ध मठों के अलावा बैतूल (11), छिंदवाड़ा (1) और पांढुर्णा (1) में भी फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने की पुष्टि हुई है, जो सभी साल 2021 से 2023 के बीच तैयार किए गए थे। पूछताछ में मास्टरमाइंड रियाल चौधरी ने स्वीकार किया कि वह एक फर्जी पासपोर्ट तैयार करने के एवज में 20 से 25 हजार रुपये वसूलता था। आरोपी ने इन पैसों के बंटवारे और पासपोर्ट प्रक्रिया में शामिल स्थानीय मददगारों के बारे में कई अहम जानकारियां दी हैं, जिनकी गहराई से तफ्तीश की जा रही है।
अब तक चार आरोपी गिरफ्तार, एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी कि मठों के पते अपराधियों तक कैसे पहुंचे
एसटीएफ डीआईजी राहुल कुमार लोढ़ा ने बताया कि इस मामले में अब तक मुख्य आरोपी रियाल चौधरी समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें नागपुर से जॉय चौधरी और त्रिपुरा से प्रियंक चौधरी को भी दबोचा गया है। फिलहाल जांच एजेंसी यह खंगालने में जुटी है कि धार्मिक और संवेदनशील बौद्ध मठों के पते इन अपराधियों तक कैसे पहुंचे, आवेदन के दौरान कौन-से फर्जी कागजात लगाए गए और इस पूरे सिंडिकेट में और कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं।

