सीधी: भारतीय स्टेट बैंक सीधी गायत्री काम्प्लेक्स के सभागार में हिन्दी – दिवस समारोह गरिमापूर्ण रूप में सम्पन्न हुआ। आयोजन विचार – गोष्ठी एवं काव्यपाठ के साथ दो रूपों में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व शाखा प्रबंधक एवं प्रतिष्ठित समाजसेवी जगत प्रताप सिंह ने की एवं संचालन डॉ. शिव शंकर मिश्र सरस ने किया।
कार्यक्रम में ओम प्रकाश – त्रिपाठी ने संबोधित करते हुए हिन्दी के राजभाषा होने से लेकर आधुनिक – समय में इसके अस्तित्व और प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे। आदर्श सिंह ने अर्थव्यवस्था के
संदर्भ में हिन्दी के महत्व को रेखांकित किया। चर्चित चिंतक एवं लेखक सोमेश्वर सिंह ने हिन्दी को आवश्यकतानुसार उपयोग में लाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हिन्दी हमारी अनमोल विरासत है जो निरन्तर प्रगतिशील है। यह
अरबी, फारसी और उर्दू जैसी अनेक भाषाओं को स्वयं में समेटे हुए है। मंच संचालक डॉ. शिवशंकर मिश्र सरस ने हिन्दी के विस्तार में 17 लोक बोलियों के अमूल्य योगदान पर प्रकाश डाला। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की श्रृंखला में कुमारी
अमृता पाण्डेय ने रामायण के प्रसंगों से जोड़ते हुए मातृभाषा का महत्व बताया और जननी जन्मभूमि स्वर्गादपि गरीयसी के भाव को रेखांकित करते हुए मधुर स्वर में काव्यपाठ किया। तत्पश्चात अशोक अकेला ने काव्यपाठ करते हुए लेखक को हमेशा सत्ता के विरोध में खड़े रहने पर बल दिया। सुप्रसिद्ध कवि और चिंतक डॉ. अनिल सिंह सत्यप्रिय ने अपने संबोधन में उत्तर और दक्षिण भारत को भाषाई आधार पर अलग दृष्टिकोण से देखने वालों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने हिन्दी के संवर्धन के लिए युवावस्था पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपने का आह्वान किया।
ख्यातिलब्ध बघेली कवि धीरेन्द्र त्रिपाठी ने अपने काव्यपाठ से सभा को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के अध्यक्ष ने सीधी के साहित्य पर विस्तार से चर्चा करते हुए अधिक से अधिक बड़े लेखकों के साहित्य को पढ़ने की बात की एवं हिन्दी की अनेकों पुस्तकों पर जो हिन्दी की गरिमा को बढ़ाती हैं पर चर्चा की। कार्यक्रम के समापन पर बैंक प्रबंधक मनीष कुमार ने बैंकों में हिन्दी का महत्व एवं भूमिका पर चर्चा करते हुए उपस्थित नगर के सभी साहित्यकारों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सभी का साल एवं श्रीफल से सम्मानित किया। इस अवसर पर बैंक का पूरा स्टाफ तथा नगर के साहित्यप्रेमी जन भी उपस्थित रहे, जिससे हिन्दी दिवस का कार्यक्रम भव्यता से सम्पन्न हुआ
