नयी दिल्ली, 15 सितंबर (वार्ता) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली सरकार राजधानी के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले 10 हजार विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल का निर्माण करेगी।
श्रीमती गुप्ता ने कहा कि इन छात्रावासों का निर्माण विभिन्न विभागों के माध्यम से कराया जायेगा और आवश्यकता पड़ने पर जमीन लेकर भी हॉस्टल बनाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि छात्राओं और छात्रों, दोनों के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और किफायती आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली देश की राजधानी होने के साथ एक बड़ा शिक्षा केंद्र भी है। देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में युवा उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली आते हैं। कॉलेज और विश्वविद्यालयों में प्रवेश मिलने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक सुरक्षित और किफायती आवास की व्यवस्था करना होती है। सरकार इसी समस्या का स्थायी समाधान तलाश रही है। दिल्ली सरकार के विश्वविद्यालयों और संस्थानों के अलावा दिल्ली के किसी भी कॉलेज या विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। सरकार उन कॉलेजों का भी सर्वे करायेगी, जहां हॉस्टल निर्माण के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध हैं। उपयुक्त स्थानों की पहचान के साथ छात्रावास निर्माण की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हॉस्टलों का निर्माण पीपीपी आधार पर भी कराया जायेगा। इससे निर्माण में तेजी के साथ-साथ हॉस्टलों के रखरखाव और विद्यार्थियों को लगातार बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। सरकार केवल हॉस्टल बनाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वहां विद्यार्थियों की सुरक्षा, सुविधा और आवश्यक जरूरतों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि अंबेडकर विश्वविद्यालय, धीरपुर, जी.बी. पंत इंजीनियरिंग कॉलेज एवं पॉलिटेक्निक, इंदिरा गांधी अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज और दिल्ली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी सहित कई संस्थानों में हॉस्टल निर्माण का काम चल रहा है या प्रस्तावित है।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग सहित संबंधित विभागों को भी हॉस्टल निर्माण से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस दिशा में विभिन्न विभागों के साथ बैठकें की जा रही हैं। उपयुक्त स्थानों की पहचान की जा रही है और छात्रावासों से संबंधित नीति का प्रारूप भी तैयार किया जा रहा है।
