सिंहस्थ पूर्व ओंकारेश्वर को उज्जैन सी दरकार

मालवा- निमाड़ की डायरी

संजय व्यास

सिंहस्थ को डेढ़ साल बचा है. दूर-दूर से आए श्रद्धालु महाकालेश्वर के दर्शन पश्चात ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा करने पहुंचते हैं. भीड़ प्रबंधन व सुगम दर्शन के लिए जिस प्रगति से उज्जैन का कायाकल्प किया जा रहा है, वैसी ही दरकार ओंकारेश्वर को है. उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ के लिए सरकार ने विशेष अमला नियुक्त कर रखा है, पर ओंकरेश्वर का जिम्मा स्थानीय व जिला प्रशासन के पास है. विकास कार्यों के लिए राशि की कोई कमी नहीं है, लेकिन योजनाबद्ध विजन के अभाव में कार्य गति नहीं पकड़ पा रहे. उज्जैन में तो महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की व्यवस्थाएं मुख्यमंत्री के रहते दुरुस्त हो रही हैं, लेकिन ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में तो जिला प्रशासन और लोकल के लोग व्यवस्थित कार्य नहीं कर पा रहे. जिला प्रशासन के पास और भी जिले भर के कार्य होने से अव्यवस्थाओं को नहीं रोका जा सकता. इसलिए अभी तक कोई कार्य धरातल पर नजर नहीं आ रहा. उधर ओंकारेश्वर में धर्मालु पर्यटकों की जब-तब डूबने से मौत की घटनाओं की रोकथाम की दिशा में भी सफल प्रयास नहीं दिख रहे. ओंकारजी के दर्शन के लिए लोग आते हैं और प्रशासनिक लापरवाही के चलते 10 प्रतिशत लोग बिना दर्शन के ही वापस जा रहे हैं. ऐसे में सवाल यह उठता है कि सिंहस्थ के समय लोगों को किस तरह नया सिस्टम दिया जाएगा. समय की कमी के मद्देनजर अब सरकार को ओंकारेश्वर के लिए भी अलग से अमले की तैनाती जरूरी है. ताकि सिंहस्थ पूर्व सारी व्यवस्था और विकास कार्य सुचारु हो जाए. मांधाता के विधायक नारायण पटेल पहले ही कह चुके हैं कि यहां की व्यवस्थाएं इंदौर प्रशासन के उच्च अधिकारियों को सौंप दी जानी चाहिए.

पटेल-अजनार भिड़े

आलीराजपुर के पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष महेश पटेल और भाजपा नेता व सामाजिक कार्यकर्ता कमरू अजनार में विगत दिनों जमकर तू-तू मैं-मैं

हुई .दरअसल क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण के मुद्दे पर महेश पटेल धरना प्रदर्शन कर रहे थे. उन्होंने आदिवासियों की जमीन छिन जाने की बात के साथ अजनार को भी लपेटे में ले लिया. पटेल ने ग्राम खंडाला में आदिवासियों की जमीन खेती के नाम पर हड़पने का आरोप अजनार पर लगा दिया. इससे अजनार भडक़ गए. उन्होंने पटेल को आड़े हाथ लिया और चुनौती दी कि बताएं मैंने किसकी जमीन हड़प ली. रही बात जमीन अधिग्रहण की तो मुख्यमंत्री, कलेक्टर खुद कह चुके हैं कि किसी की जमीन नहीं ली जाएगी. फिर भी महेश पटेल आदिवासियों को बरगलाने में लगे है.

ओवैसी की उम्मीद पर खंडवा ने पानी फेरा

विगत निकाय चुनावों में आप, एआईएमआईएम ने प्रदेश में राजनीतिक पैर पसारने की संभावना देखने अपने उम्मीदवार उतारे थे. अंचल में एआईएमआईएम को खंडवा खरगोन में कुछ सफलता मिली भी. खंडवा, बुरहानपुर नगर निगम और खरगोन में उसके पांच प्रत्याशी विजयी रहे थे. खंडवा व बुरहानपुर नगर निगम में एक-एक पार्षद चुने गए थे, वहीं खरगोन नगर पालिका में एक हिंदू महिला सहित तीन उम्मीदवारों ने पार्षद पद पर जीत दर्ज कर पार्टी का खाता खुलवाया था. इन क्षेत्रों में सफलता से पार्टी प्रमुख असुद्दीन ओवैसी उत्साहित थे, परंतु अगले चुनाव आते-आते भावी तैयारी में लगे असुद्दीन ओवैसी को खंडवा ने झटका दे दिया है. हाल में खंडवा नगर निगम में एआईएमआईएम के एकमात्र पार्षद शाकिरा बिलाल पेंटर ने पार्टी से किनारा कर लिया. वे ही नहीं उनके साथ पार्टी के कई बड़े पदाधिकारियों ने कांग्रेस की विचारधारा में आस्था जताते हुए कांग्रेस का दामन थाम लिया. कांग्रेस में शामिल होने वालों में पूर्व शहर अध्यक्ष बिलाल पेंटर, पूर्व यूथ अध्यक्ष मुस्तकीम तिगाला और महिला विंग की पूर्व सचिव सहाना सैय्यद शाह शामिल हैं. मुस्लिम बहुल खंडवा से आगामी वर्ष होने वाले निकाय चुनाव में ओवैसी को खंडवा से काफी उम्मीद थी और इसके लिए वे अधिक से अधिक पार्षद पद पाने की रणनीति तैयार करने में लगे थे.

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