नई दिल्ली, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साल 2029 से पहले 21 एनडीए-शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के ऐलान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। जेडीयू के बाद अब केंद्रीय मंत्री व एलजेपी (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी समानता और विविधता दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है, लेकिन किसी भी ठोस फैसले से पहले यूसीसी का ड्राफ्ट सार्वजनिक किया जाना चाहिए, स्टेकहोल्डर्स के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए और विस्तृत विचार-विमर्श होना चाहिए।
संविधान की पांचवीं-छठी अनुसूची और अनुच्छेदों का हवाला, सामाजिक ताना-बाने की विविधता को बताया अहम
अपने सोशल मीडिया पोस्ट और बयानों में चिराग पासवान ने रेखांकित किया है कि भारत का सामाजिक ताना-बाना अत्यंत विविधतापूर्ण है और विभिन्न वर्गों की अपनी नागरिक परंपराएं व रीति-रिवाज हैं। संविधान की पांचवीं-छठी अनुसूची तथा अनुच्छेद 371A और 371G के तहत अनुसूचित जनजातियों को दी गई विशेष छूट इस बात का प्रमाण है कि देश में कानून बनाते वक्त सांस्कृतिक व सामाजिक विविधता का संरक्षण जरूरी है।
मुंबई में अमित शाह के ऐलान के बाद एनडीए में अलग सुर, जेडीयू ने भी बिहार में विरोध का दोहराया रुख
गौरतलब है कि मुंबई में गृह मंत्री अमित शाह ने एनडीए शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू करने का संकल्प जताया था, जिसके बाद जेडीयू नेता श्याम रजक ने स्पष्ट किया था कि पार्टी संसद में भले समर्थन करे, पर बिहार में इसे लागू करने के पक्ष में नहीं है। चिराग पासवान के ताजे रुख ने यह साफ कर दिया है कि एनडीए के भीतर क्षेत्रीय और वैचारिक बारीकियों के मद्देनजर यूसीसी पर व्यापक सहमति और पारदर्शी ड्राफ्ट की मांग जोर पकड़ रही है।

