जबलपुर:लव मैरिज करने के बाद महिला ने अपने पति के साथ रहने से इंकार कर दिया। हाईकोर्ट जस्टिस आनंद पाठक तथा जस्टिस बी पी शर्मा की युगलपीठ ने याचिकाकर्ता के पति को हिन्दू मैरिज एक्ट के तहत आवेदन दायर करने की स्वतंत्रता प्रदान की है। इसके पूर्व पिता के द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में उक्त महिला ने डेढ़ माह पूर्व हाईकोर्ट में कहा था कि वह अपने पति के साथ रहना चाहती है।
गौरतलब है कि जिला मऊगंज निवासी विवेक कुमार साहू के क्षेत्र में रहने वाली एक लड़की से प्रेम संबंध थे। दोनों ने घर से भागकर प्रेम विवाह कर लिया था। बेटी के लापता होने पर पति के द्वारा शाहपुर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गयी थी। पुलिस के द्वारा बेटी की तलाश नही किये जाने का आरोप लगाते हुए उनकी तरफ से हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस ने महिला को विगत 20 जुलाई को हाईकोर्ट में पेश किया था। महिला ने हाईकोर्ट में कहा था कि वह अपने माता.पिता नही बल्कि पति के साथ रहना चाहती है।
पति विवेक कुमार साहू की तरफ से ससुर द्वारा उसकी पत्नी को बंधक बनाकर रखे जाने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट ने विगत 20 अगस्त को याचिका की सुनवाई करते हुए महिला को पेश करने के आदेश जारी किये थे। महिला ने विगम 5 सितम्बर को हाईकोर्ट में उपस्थित होकर कहा है कि वह अपने पिता के साथ जाना चाहती है। युगलपीठ ने पारित अपने आदेश में कहा है कि महिला बालिग है और याचिकाकर्ता उसकी कस्टडी पाने के लिए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत उपलब्ध कानूनी उपाय का सहारा ले सकता है। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ याचिका का निराकरण कर दिया।
