
मंदसौर। शिवना नदी तट पर पशुपतिनाथ महादेव मंदिर के सामने स्थित अति प्राचीन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्राजी के काष्ठ विग्रह वाले सिद्ध स्थल की प्रसिद्धि लगातार बढ़ रही है। भगवान जगन्नाथ के 500 वर्ष से अधिक पुराने विग्रह मंदसौर में विराजित होने की जानकारी मिलने के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
प्रतिमाह शुक्ल पक्ष की द्वितीया को होने वाली महाआरती में इस माह सिंधी समाज एवं पारख समाज मुख्य यजमान रहे। सिंधी समाज की ओर से दृष्टानंद नैनवानी, वासुदेव खेमानी, वासुदेव सेवानी, नंदूभाई आडवाणी, राजेश चाहुजा एवं प्रमोद ककनानी तथा पारख समाज की ओर से गिरीश पारिख, अशोक पारिख, विनय पारेख, उमेश पारिख, जीतू पारिख, प्रबोध पारिख, राजकुमार पारिख एवं गौरव पारख ने प्रतिनिधित्व किया।
महाआरती के दौरान ‘जगन्नाथ स्वामी तू न संभाले तो हमें कौन संभाले’ की पुकार के साथ भक्तों ने भगवान की आरती उतारी। भजन गायक विश्वनाथ गढ़िया द्वारा प्रस्तुत भजनों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया। भगवान जगन्नाथ का श्रृंगार एवं प्रसाद वितरण संजीव त्रिवेदी, ललित खेमानी एवं बालकृष्ण दवे की ओर से किया गया।
जीर्णोद्धार में आगे आ रहे दानदाता
अति प्राचीन भगवान जगन्नाथ के सिद्ध स्थल का जीर्णोद्धार कार्य लगातार जारी है। कार्य में सहयोग के लिए दानदाता भी आगे आ रहे हैं। महाआरती में रमेश पारख, अमृतकुमार पोरवाल, राजेश पारख, गोपाल पाटीदार, प्रीतम खेमानी, अनिल गुप्ता, संजीव त्रिवेदी, ललित खेमानी, बालकृष्ण दवे, योगेश गुप्ता, प्रदीपकुमार शर्मा, राजेंद्र परमार, जुगलकिशोर भावसार, राजनारायण भटनागर, श्रीमती कांता भावसार, सविता भटनागर, संध्या पंचारिया सहित अनेक महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।
