नई दिल्ली, जुलाई 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 किए जाने के बाद चार अलग-अलग उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को शीर्ष अदालत में प्रमोट कर दिया गया था, जिससे उन अदालतों में पद खाली हो गए थे। इसके अलावा, कुछ अन्य सीजे के रूटीन रिटायरमेंट के कारण देश के कुल 25 हाई कोर्ट्स में से 7 अदालतों की कमान कार्यवाहक (एक्टिंग) मुख्य न्यायाधीशों के हाथों में चली गई थी, जिसके चलते न्यायपालिका में स्थायी नियुक्तियों की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करना अनिवार्य हो गया था।
कॉलेजियम की बैठकों में तय हुए नए नाम, राजस्थान हाई कोर्ट के विवाद को सुलझाते हुए जस्टिस संजय के. अग्रवाल को मिली जिम्मेदारी
अगस्त और सितंबर के दौरान मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में हुई कॉलेजियम की बैठकों में देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों के लिए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गईं, जिनमें जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा, जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी जैसे वरिष्ठ जजों को विभिन्न राज्यों में नियमित चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया। इस बीच, राजस्थान हाई कोर्ट में एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा की प्रशासनिक शक्तियों और कार्यप्रणाली को लेकर वकीलों के प्रदर्शन व विवाद के बाद, कॉलेजियम ने 31 अगस्त की बैठक में छत्तीसगढ़ के जज जस्टिस संजय के. अग्रवाल को राजस्थान का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की थी।
केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद सभी उच्च न्यायालयों में फुल-टाइम चीफ जस्टिस की हुई नियुक्ति, समाप्त हुआ अनिश्चितता का दौर
केंद्र सरकार द्वारा कॉलेजियम की इन सभी सिफारिशों पर मुहर लगाने के बाद सितंबर के पहले हफ्ते में न केवल जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने राजस्थान हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली, बल्कि देश के अन्य सभी बचे हुए उच्च न्यायालयों में भी स्थायी मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। इस तरह से पिछले कुछ महीनों से जजों के तबादलों, रिटायरमेंट और आंतरिक विवादों के कारण अदालती कामकाज में आई अनिश्चितता का दौर अब पूरी तरह समाप्त हो गया है और सभी हाई कोर्ट्स में फुल-टाइम नेतृत्व बहाल हो चुका है।

