
सागर। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सागर पुलिस अधीक्षक को हटा कर ईओडब्ल्यू से जांच कराने की मांग मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव से की है। श्री सिंह आज सागर जिले के बण्डा शाहगढ क्षेत्र मे जहरीली-अवैध शराब के सेवन से प्रभावित परिवारो से मिलने के बाद सागर के सर्किट हाउस मे पत्रकारो से चर्चा कर रहे थे। उन्होने आरोप लगाया कि सागर जिले मे आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन के संरक्षण मे अवैध शराब का कारोबार फल फूल रहा है।
दोनो विभागो ने लूट मचा रखी है। जिला पुलिस अधीक्षक पर प्रमाण के साथ आरोप लगाते हुए श्री सिंह ने कहा कि अगर गलत है तो कोर्ट मे मेरे विरूद्ध मानहानि का दावा करे। शिवपुरी के एक लाईसेंसी शराब ठेकेदार की जांच भी कराई जाए। पुलिस प्रशासन को बण्डा शाहगढ मे हुई चालीस मौतो के लिए अलग अलग एफआईआर दर्ज करना चाहिए। साथ ही जिस से शराब खरीदी है, उसको भी आरोपी बनाना चाहिए। जहरीली-अवैध शराब कांड की मजिस्ट्रियल जांच कराए जाने के सवाल पर श्री सिंह ने कहा कि मुझे जांच पर भरोसा नही क्योंकि सेवानिवृत्त न्यायाधीश व्ही के चौहान के द्वारा ही व्यापमं घोटाले की जांच कर संबंधितो को क्लीन चिट दी गई थी। जहरीली-अवैध शराब के सेवन से मृत चार परिवार को पूर्व मुख्यमंत्री श्री सिंह ने गोद लेने की घोषणा करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सहित समस्त कांग्रेसजनों से एक एक परिवार को गोद लेने की बात कही। साथ ही पीड़ित परिवार की पत्नी को 10-10 हज़ार रूपए हर माह भेजने के साथ बच्चो की शिक्षा की जिम्मेदारी श्री सिंह ने स्वयं ली।श्री सिंह ने कहा कि बण्डा शाहगढ क्षेत्र के मृतको के परिजनो के मुआवजा हादसे के सात दिन बाद भी स्पष्ट नही है। धरना-प्रदर्शन के दौरान अपर कलेक्टर मौके पर ही चार लाख के साथ दो लाख रुपए अतिरिक्त दिलाने का आश्वासन देकर आये थे। यह स्पष्ट आज दिनांक तक किया गया कि संबल कार्ड वाले को ही मुआवजा मिलना है कि जहरीली-अवैध शराब के सेवन के शिकार सभी को। ऐसी असंवेदनशील सरकार नही देखी। जिला कलेक्टर सागर को कई फोन लगाने के बाद भी पूर्व मुख्यमंत्री का मोबाइल रिसीव नही किया। जो कि गंभीर बात है। मुख्य सचिव से आज ही बात करेगे।
