
इंदौर. खरगोन जिले में तेज आंधी-तूफान के बाद कमजोर हुई 33 केवी विद्युत लाइन के तारों को विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने बारिश के बीच महज सात घंटे में बदलकर विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को बहाल रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में डेब नदी के ऊपर से गुजर रही विद्युत लाइन के तार बदलने के लिए 25 लाइन स्टाफ के साथ गोताखोरों और तैराकों की मदद ली गई.
220 केवी अति उच्च दाब उपकेंद्र जुलवानिया से सैगांव तक जाने वाली 33 केवी फीडर लाइन भूलगांव के पास डेब नदी के ऊपर से गुजरती है. शुक्रवार रात मौसम में अचानक बदलाव और तेज आंधी-तूफान के कारण इस लाइन के तार अत्यंत कमजोर होकर टूटने की स्थिति में पहुंच गए थे. सूचना मिलते ही बिजली कंपनी के कर्मचारियों ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी. विद्युत आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए गोलवाड़ी उपकेंद्र को तत्काल वैकल्पिक 33 केवी लाइन पर शिफ्ट किया गया. इसके बाद शनिवार अलसुबह से नदी के दोनों छोर के बीच नए तार डालने का काम शुरू किया गया. बारिश और नदी में पानी के बावजूद कर्मचारियों, तैराकों और गोताखोरों ने समस्त सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करते हुए कार्य को तेजी से पूरा किया. बिजली कंपनी के अधिकारियों के अनुसार इस प्रकार के चुनौतीपूर्ण कार्य को पूरा करने में सामान्यतः करीब 24 घंटे का समय लगता है, लेकिन खरगोन प्रथम संभाग के कर्मचारियों ने इसे मात्र सात घंटे में पूरा कर लिया। यह 33 केवी लाइन गोलवाड़ी उपकेंद्र को विद्युत आपूर्ति करती है, जिससे करीब 20 गांवों की आबादी को बिजली मिलती है.
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक अनूप कुमार सिंह ने कर्मचारियों की तत्परता और कार्य के प्रति समर्पण की सराहना की. कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक प्रकाश सिंह चौहान, मुख्य अभियंता राजेश जैन, खरगोन अधीक्षण अभियंता जेपी ठाकुर और कार्यपालन अभियंता सौरभ साहू ने भी विद्युतकर्मियों के इस कार्य को सराहा.
