
जबलपुर। प्लॉट बेचने के नाम पर बिल्डर ने ड्राइवर से 14,40,000 ऐंठ लिए और एक ऐसे प्लॉट की रजिस्ट्री कर दी, जो जमीन पर अस्तित्व में ही नहीं है। रजिस्ट्री होने के बाद जब नामांतरण कराने पीडि़त अतिरिक्त तहसीलदार कार्यालय पहुचा तो फर्जीवाड़े का राज खुला। पुलिस ने मामले में आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, गोरा बाजार निवासी चंद्र प्रकाश विश्वकर्मा ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि वे पेशे से ड्राइवर है उसके पिता छकोडीलाल विश्वकर्मा ने गोरखपुर निवासी रमनीत सिंह सेठी से संपर्क किया था। रमनीत सिंह मैसर्स जी. के. एस. कंस्ट्रक्शन कंपनी के नाम से जमीन पर प्लॉटिंग काट कर बेचने का काम करता है। आरोपी ने उन्हें पटवारी हल्का नं. 80, रा.नि.म. खमरिया के अंतर्गत आने वाली भूमि खसरा नंबर 76/1/2 में प्लॉट नं. 11 और 12 दिखाया। कुल 2033.89 वर्गफुट के इस हिस्से का सौदा 14,40,000 में तय हुआ।
दो किश्तों में ली नगद राशि, रजिस्ट्री भी की
पीडि़त चंद्र प्रकाश ने बताया कि सौदा तय होने के बाद रमनीत सिंह ने दो दिन में रजिस्ट्री करने का भरोसा दिया। उसने रजिस्ट्री से दो दिन पहले 6,61,500 नगद ले लिए। इसके बाद 16 फरवरी 2023 को जबलपुर पंजीयन कार्याल में गवाह दामोदर पुरी के समक्ष शेष राशि 7,78,500 भी नगद प्राप्त कर ली। पूरी रकम मिलने के बाद आरोपी ने चंद्र प्रकाश विश्वकर्मा के नाम पर रजिस्ट्री निष्पादित कर दिया।
पटवारी की रिपोर्ट ने उड़ाए होश
धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब पीडि़त चंद्र प्रकाश ने जमीन का नामांतरण अपने नाम पर कराने के लिए कार्यालय अतिरिक्त तहसीलदार बरेला में आवेदन प्रस्तुत किया। जब पटवारी ने मौके और रिकॉर्ड की जांच की, तो उनके होश उड़ गए। पटवारी ने लिखित रिपोर्ट दी कि खसरा नंबर 76/1/2 में उतना रकबा उपलब्ध ही नहीं है, जितना रजिस्ट्री में बेचा गया है। रकबा गायब होने के कारण तहसीलदार कार्यालय ने नामांतरण खारिज कर दिया। पीडि़त को जब समझ आया कि रमनीत सिंह सेठी ने फर्जी लेआउट दिखाकर उनसे 14.40 लाख की ठगी की है, तो उन्होंने बरेला थाने में मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। लंबी जांच के बाद पुलिस ने अब मामले में एफआईआर दर्ज की है। आरोपित के खिलाफ पूर्व में कई धोखाधड़ी संबंधित मामले पहले से ही दर्ज है।
