
जबलपुर। बालाघाट में बीमारी से प्रभावित इलाकों में बैगा बच्चों की मौत के मामले में हाईकोर्ट में आज सुनवाई हुई।जनहित याचिका पर हाईकोर्ट के निर्देश के बाद याचिकाकर्ता अंशुल तिवारी और उनके वकीलों ने प्रभावित इलाकों का ग्राउंड सर्वे किया था। इसकी रिपोर्ट और वीडियो साक्ष्य कोर्ट के सामने पेश किए गए। सर्वे रिपोर्ट में प्रभावित क्षेत्रों में बैगा परिवारों के सामने साफ पेयजल, राशन, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की गंभीर स्थिति का दावा किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश आदिवासी परिवारों के पास राशन कार्ड नहीं हैं। जिन परिवारों के पास राशन कार्ड हैं, उन्हें भी इल्ली लगा चावल दिए जाने का आरोप लगाया गया है। सर्वे के दौरान प्रभावित इलाकों की सड़कों और अस्पतालों की बदहाल स्थिति के वीडियो भी रिकॉर्ड किए गए, जिन्हें कोर्ट में पेश किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकीलों को निर्देश दिए कि ग्राउंड सर्वे में सामने आए सभी तथ्यों को याचिका में शामिल किया जाए। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वकीलों ने बताया कि बालाघाट के प्रभावित इलाकों में डे-टू-डे बेसिस पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके साथ ही डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग भी की जा रही है। इस पर हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या प्रशासन 27 बैगा बच्चों की मौतों के बाद जागा है..?
पानी और राशन की व्यवस्था पर सवाल
ग्राउंड सर्वे रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रभावित इलाकों में बैगा जनजाति के लोगों के पास पीने के साफ पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। रिपोर्ट में राशन कार्ड और खाद्यान्न वितरण की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से इन सभी व्यवस्थाओं की स्थिति को वीडियो साक्ष्यों के जरिए कोर्ट के सामने रखा गया।
सड़क -अस्पतालों की बदहाली
रिपोर्ट में प्रभावित क्षेत्रों की सड़कों और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति भी दिखाई गई है। याचिकाकर्ता की ओर से मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पूरे मामले पर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मामले में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।
