
उसने बताया कि यात्री वाहनों की कुल बिक्री 4,02,398 इकाई रही। यह अगस्त 2025 की तुलना में 16.14 प्रतिशत की वृद्धि है। खास बात यह रही कि इसमें वैकल्पिक ईंधनों की हिस्सेदारी बढ़कर 41.95 प्रतिशत पर पहुंच गयी जबकि पेट्रोल इंजन वाले वाहनों की हिस्सेदारी 40.85 प्रतिशत पर रही।
दुपहिया की बिक्री 17,14,610 इकाई रही। इसमें 19.69 प्रतिशत की बढ़त देखी गयी। तिपहिया की बिक्री 8.64 प्रतिशत बढ़कर 1,22,281 इकाई पर और वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 14.45 प्रतिशत बढ़कर 90,769 इकाई पर रही। ट्रैक्टरों की बिक्री 87,977 इकाई रही जो एक साल पहले के मुकाबले 8.64 प्रतिशत अधिक है। निर्माण उपकरणों की बिक्री में 31.45 प्रतिशत का उछाल देखा गया। इनकी बिक्री 5,166 इकाई रही।
मासिक आधार पर इस साल जुलाई की तुलना में अगस्त में सभी खंडों में गिरावट देखी गयी है। कुल बिक्री में माह-दर-माह 6.48 फीसदी की गिरावट रही। फाडा के अध्यक्ष साई गिरिधर ने कहा कि जुलाई के रिकॉर्ड बिक्री के मुकाबले अगस्त में 6.48 प्रतिशत की कमी आई। इसका कारण मानसून के दौरान सुस्ती और त्योहारों के कैलेंडर में बदलाव था – गणेश चतुर्थी और ओणम की खरीदारी का सितंबर में खिसक गयी। उन्होंने कहा, “इस महीने की सबसे अहम बात एक ढांचागत बदलाव थी। देश के इतिहास में पहली बार यात्री वाहन बाजार में वैकल्पिक ईंधन ने पेट्रोल को पीछे छोड़ दिया।” फाडा अध्यक्ष ने कहा कि मानसून की कमी के कारण ट्रैक्टर की बिक्री स्थिर रही और जुलाई की तुलना में इसमें 25.03 प्रतिशत की गिरावट आई, लेकिन ग्रामीण इलाकों के बाकी सभी खंडों ने शहरी इलाकों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया।
आंकडों के मुताबिक, शहरी इलाकों में यात्री वाहनों की बिक्री में 10.93 प्रतिशत की बढ़ोतरी के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में इसमें 24.99 प्रतिशत की वृद्धि हुई। ग्रामीण इलाकों में वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 16.33 प्रतिशत और तिपहिया की बिक्री 23.95 प्रतिशत बढ़ी, जबकि शहरी इलाकों में तिपहिया में गिरावट दर्ज की गयी। श्री गिरिधर ने कहा कि ग्रामीण मांग अब मानसून पर निर्भर नहीं रही। खेती से जुड़ी आय वाला सेक्टर भले ही धीमा पड़ा, लेकिन आजीविका, सामान की ढुलाई और निर्माण से जुड़ी ग्रामीण अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ती रही।
दुपहिया के बारे में उन्होंने कहा कि आठ साल के उतार-चढ़ाव के बाद बिक्री का ट्रेंड फिर से पटरी पर लौटा है, हालांकि माह-दर-माह इसमें 5.70 प्रतिशत की कमी आई है। इस मामले में भी ग्रामीण इलाकों में वृद्धि बेहतर रही। ग्रामीण इलाकों में 20.25 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 19.07 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। दुपहिया में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 10.68 प्रतिशत तक पहुंच गई। एक साल पहले यह 7.66 प्रतिशत थी।
फाडा ने बताया कि डीलरों की उम्मीदें अभी शुरू हो रहे त्योहारी मौसम पर टिकी हैं – गणेश चतुर्थी, ओणम की बिक्री का असर और नवरात्रि की शुरुआत। उसने कहा कि दुपहिया को त्योहारी मांग और वैकल्पिक ईंधन की ओर बदलाव से समर्थन मिलना चाहिये। हालांकि ग्रामीण इलाकों में नकदी की उपलब्धता सीजन के अंत में होने वाली बारिश पर निर्भर करेगी।
सितंबर-अक्टूबर-नवंबर की अवधि के लिए 81.62 प्रतिशत डीलर बिक्री में वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। साल के मुख्य त्योहार इसी समय आते हैं जो गणेश चतुर्थी और नवरात्रि से शुरू होकर धनतेरस और दिवाली तक चलता है, जो इस साल नवंबर में पड़ रहे हैं।
