बेंगलुरु। भारत ने 2030 तक हर साल 50 अंतरिक्ष लॉन्च करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। IN-SPACe के चेयरमैन पवन गोयनका के मुताबिक, इस लक्ष्य की सबसे बड़ी ताकत होगी—ISRO की तकनीक और निजी कंपनियों की कारोबारी क्षमता का मेल। पांच साल पहले भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोला था। तब से तस्वीर तेजी से बदली है। देश में स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या बढ़कर 440 से ज्यादा हो गई है। स्काईरूट, अग्निकुल, पिक्सल और दिगांतारा जैसी कंपनियां रॉकेट, सैटेलाइट और स्पेस-टेक सेवाओं में काम कर रही हैं।
लेकिन सवाल है—50 लॉन्च हर साल कैसे होंगे?
इसके लिए सिर्फ रॉकेट बनाना काफी नहीं होगा। भारत को बड़े पैमाने पर रॉकेट और सैटेलाइट निर्माण, लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर और नई तकनीक विकसित करनी होगी। भारत की स्पेस इकोनॉमी फिलहाल करीब 9 अरब डॉलर की है, जिसे अगले दशक में 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचाने का अनुमान है। यानी मिशन साफ है—भारत में निर्माण, भारत से लॉन्च और पूरी दुनिया को सेवाएं। अगर यह लक्ष्य हासिल हुआ, तो भारत सिर्फ अंतरिक्ष में पहुंचने वाला देश नहीं, बल्कि वैश्विक स्पेस मार्केट का बड़ा खिलाड़ी बन सकता है।
