भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में माइनिंग, एआई, सर्विस, टेक्सटाइल, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं हैं। साइंस सिटी भी मध्यप्रदेश में विकसित हो रही है। निवेशको के लिए हर क्षेत्र में निवेश करने की गुंजाइश है। मध्यप्रदेश सूक्ष्म, लघु, कुटीर और भारी उद्योग को लेकर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उद्योग अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए कई पुराने कानून खत्म किए गए हैं, 25 से अधिक पारदर्शी नीतियां लागू की गई हैं। पहले उद्योगों के लिए जमीन आवंटन में करीब 60 दिन लगते थे, अब उद्योगों के लिए जमीन मात्र 29 दिनों के अंदर मिल रही है। राज्य में तेजी से औद्योगिक ईकाइयां शुरू हो रही हैं। अधोसंरचना विकास में भी तेजी आई है और मध्यप्रदेश विकास की नई छलांग लगा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुबई यात्रा के दौरान मीडिया से चर्चा में यह विचार व्यक्त किए।
मध्यप्रदेश का निर्यात 76 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में तेजी से आगे बढ़ रहे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर से 1.10 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार का अवसर मिला है। प्रदेश में कृषि आधारित फूड प्रोसेसिंग की बड़ी इकाइयां स्थापित हो रही हैं, जिनसे रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। दूसरी ओर, राज्य सरकार शासकीय पदों पर भर्तियां करने के साथ-साथ सभी विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ भी दे रहे हैं। राज्य सरकार के प्रयासों से वर्ष 2025-26 में प्रदेश का निर्यात 68 हजार 875 करोड़ रुपये और वर्ष 2026-27 में 76 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। राज्य की आर्थिक विकास दर लगातार बढ़ रही है और बजट में भी निरंतर बढ़ोतरी की जा रही है।
मध्यप्रदेश में पर्याप्त बिजली, इंडस्ट्रियल लैंड बैंक और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर है
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में प्रतिभाशाली युवाओं की कोई कमी नहीं है। राज्य में रीवा, इंदौर और उज्जैन में 3 नए आईटी पार्क विकसित किए जा रहे हैं। आधुनिक तकनीक के विकास में ड्रोन, डिफेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेक्टर को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में पर्याप्त बिजली, इंडस्ट्रियल लैंड बैंक और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर है। इन्हीं खूबियों के कारण मध्यप्रदेश, देशभर के उद्यमियों और निवेशकों के लिए आज आकर्षण का केंद्र बन चुका है।
प्रदेश में कुशल कामगारों की पर्याप्त उपलब्धता के लिए कि गईं है विशेष पहल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश में सबसे तेज गति से औद्योगिक विकास और बेरोजगारी दर कम करने वाला राज्य बना है। प्रदेश में स्थापित उद्योगों में कुशल कामगार पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हो सकें, इसके लिए प्रदेश में स्किल यूनिवर्सिटी, नए आईटीआई संस्थान और भोपाल में ग्लोबल स्किल डेवलपमेंट पार्क विकसित किए जा रहे हैं। उद्योग समूहों से कहा गया है वे अपने कैंपस में सरकार के सहयोग से औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र प्रारंभ करें। इससे काम करने वाले दक्ष लोगों की कमी दूर होगी। राज्य सरकार ने उद्योगों की दो श्रेणियां बनाई हैं। रोजगार परक उद्योग जैसे टेक्सटाइल सेक्टर में श्रमिकों को वीजीएफ के माध्यम से सहायता प्रदान दी जा रही है। इसके लिए निवेशकों को 5 हजार रुपए प्रति श्रमिक वेतन सहायता 10 साल तक मिलेगी। राज्य सरकार ने श्रम कानून में संशोधन किया है। अब प्रदेश में महिलाएं नाइट शिफ्ट में भी ड्यूटी कर सकेंगी। इसके लिए स्पेशल वर्किंग वुमन हॉस्टल भी तैयार किए जा रहे हैं।
प्रदेश ग्रीन एनर्जी और एविएशन सेक्टर्स में तेजी से आगे बढ़ रहा है
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने अपनी नीतियों के माध्यम से निवेशकों के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। भारत में सबसे सस्ती बिजली मध्यप्रदेश की धरती पर बन रही है। ग्रीन एनर्जी को बढ़ाने के लिए सोलर और पंप स्टोरेज को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में बिजली, पानी और लैंड बैंक की पर्याप्त उपलब्धता है, इसी कारण मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास की यात्रा में दूसरे राज्यों को पीछे छोड़ रहा है। राज्य में एविएशन सेक्टर भी तेजी से आगे बढ़ा है। अगले महीने प्रदेश से एक और इंटरनेशनल उड़ानें शारजहां के लिए शुरू होने वाली है। इस तरह पहले इंदौर और अब भोपाल से कुल दो अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू हो जाएंगी। भविष्य में प्रदेश के तीन और एयरपोर्ट ग्वालियर, जबलपुर तथा प्रस्तावित उज्जैन हवाई अड्डे से इंटरनेशनल उड़ानें शुरू की जा सकती हैं।
टूरिज्म हब बनता जा रहा है मध्यप्रदेश
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से मध्यप्रदेश टूरिज्म हब बनता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्जैन में बाबा महाकाल के महालोक का शुभारंभ किया, जिसके बाद अकेले उज्जैन में प्रतिवर्ष 10 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पहले यह संख्या 60 से 70 लाख प्रति वर्ष हुआ करती थी। पिछले वर्ष प्रदेश में 14 करोड़ से अधिक पर्यटक आए, जबकि इस वर्ष यह संख्या 20 करोड़ के पार पहुंच रही है
