ग्वालियर: विश्व गीताप्रतिष्ठानम्, ग्वालियर के तत्वाधान में चल रहे गीता ज्ञान यज्ञ सप्ताह (सप्तम चरण) के अंतर्गत काली माता मंदिर, हनुमान कालोनी, गोले का मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के विभूति योग का गहन विवेचन किया गया। कथा व्यास एवं गीता मनीषी आचार्य डॉ. विष्णु नारायण तिवारी ने श्रीमद्भगवद्गीता के दशम अध्याय के श्लोक 12 से 25 की संदर्भ सहित व्याख्या करते हुए कहा कि ईश्वर की विभूतियाँ अनन्त हैं। संसार में जो कुछ भी श्रेष्ठ, तेजस्वी, सामर्थ्यवान, सुंदर और विलक्षण दिखाई देता है, वह परमात्मा की ही विभूति का अंश है। इस गीता ज्ञान यज्ञ में प्रतिदिन सायं 3 से 6 बजे तक गीता स्वाध्याय एवं प्रवचन हो रहे हैं।
आज सोमवार को प्रातः 8 बजे से सामूहिक अखण्ड गीता पाठ एवं हवन शुरू हुआ। इसके पश्चात सायंकाल नियमित रूप से प्रवचन भी आयोजित किए जाएंगे। आचार्य डॉ. तिवारी ने कहा कि परमात्मा को बाहरी साधनों से पूरी तरह मापना संभव नहीं। सीमित बुद्धि अनंत सत्ता को पूर्णतः अपने भीतर समेट नहीं सकती। विभूति योग का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि परमात्मा बाहर ही नहीं, प्रत्येक जीव के अंतःकरण में भी विद्यमान हैं। जब मनुष्य दूसरे प्राणी में भी उसी चेतना को देखता है, तब उसके भीतर करुणा, समता और आत्मीयता का विकास होता है।
कार्यक्रम में अलकेश त्रिपाठी, डॉ. अंजना कुमारी चौहान, कालीचरण शर्मा, सीताराम शर्मा, आर. पी. शर्मा, राधा त्रिपाठी, सुनीता तिवारी, प्रशान्त सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गीता प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आयोजक गीता स्वाध्याय मंडल एवं हनुमान कालोनीवासी, गोले का मंदिर, ग्वालियर हैं। सायंकाल विभूति योग पर नियमित प्रवचन जारी रहेगा।
