मुंबई। रुपया… डॉलर के मुकाबले 94 के स्तर के करीब। शुक्रवार, 4 सितंबर को रुपया करीब ₹94.49 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। हांलाकि आज रविवार होने के कारण भारतीय फॉरेक्स मार्केट में कोई नया आधिकारिक क्लोजिंग रेट नहीं है।
लेकिन इस बार कहानी सिर्फ रुपये के कमजोर या मजबूत होने की नहीं है… कहानी है RBI के उस कदम की, जिसके जरिए केंद्रीय बैंक ने बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ाकर रुपये में जारी उतार-चढ़ाव को थामने की कोशिश की।
आखिर RBI को डॉलर बेचने की जरूरत क्यों पड़ी?
दरअसल, रुपये पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और बढ़ती डॉलर मांग का दबाव बना हुआ है। भारत के लिए महंगा कच्चा तेल यानी ज्यादा आयात बिल और ज्यादा डॉलर की जरूरत।
ऐसे वक्त में RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया और डॉलर बेचकर बाजार में उसकी उपलब्धता बढ़ाई। इसका मकसद किसी एक तय रेट को बनाए रखना नहीं, बल्कि रुपये में अचानक और तेज उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है। वहीं दूसरी तरफ भारत में विदेशी मुद्रा की बड़ी आवक भी हुई है।
RBI की विशेष योजना के तहत अगस्त के अंत तक करीब 136 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा आई, जिसमें FCNR(B) जमा का योगदान करीब 127 अरब डॉलर रहा। इससे रुपये को अतिरिक्त सहारा मिला। यानी एक तरफ डॉलर की आवक बढ़ी, दूसरी तरफ RBI ने जरूरत के वक्त डॉलर की सप्लाई बढ़ाई—और दोनों ने मिलकर रुपये को संभालने में मदद की।
*लेकिन चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है।*
अगर कच्चा तेल और महंगा हुआ या विदेशी पूंजी का बहिर्वाह बढ़ा, तो रुपये पर फिर दबाव बन सकता है। यानी आने वाले दिनों में RBI की रणनीति, कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेश और डॉलर की वैश्विक चाल रुपये की दिशा तय करने में अहम होंगे।
फिलहाल ताजा उपलब्ध आंकड़ा यही है—1 डॉलर करीब ₹94.49, और अब बाजार की नजर सोमवार के कारोबार पर रहेगी।
