मुंबई, अनिवासी भारतीयों (NRIs) द्वारा देश में रिकॉर्ड 127 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा भेजने के बाद भारतीय बैंकिंग सिस्टम में ऐतिहासिक नकदी का सैलाब आ गया है। इस भारी-भरकम सरप्लस लिक्विडिटी को नियंत्रित करने और वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आगामी सोमवार को 7 लाख करोड़ रुपये का स्पेशल 30-दिवसीय वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) ऑक्शन आयोजित करने का कड़ा फैसला किया है।
ब्याज दरों में गिरावट और महंगाई के खतरे से निपटने की बड़ी तैयारी
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के आंकड़ों के अनुसार बाजार में जरूरत से ज्यादा पैसा आ जाने के कारण शॉर्ट-टर्म मनी मार्केट में ब्याज दरें आरबीआई के मुख्य बेंचमार्क ‘रेपो रेट’ से भी नीचे लुढ़क गई थीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए और मौद्रिक नीतियों की पकड़ मजबूत रखने तथा देश में महंगाई को दोबारा भड़कने से रोकने के लिए केंद्रीय बैंक ने इतने लंबे यानी 30 दिनों के लिए फंड को लॉक करने की यह रणनीति अपनाई है।
स्वैच्छिक ऑक्शन में बैंकों की शत-प्रतिशत भागीदारी की पूरी उम्मीद
हालांकि वीआरआरआर (VRRR) एक स्वैच्छिक प्रक्रिया है जिसमें बैंक अपनी इच्छा से पैसा जमा करते हैं, लेकिन वित्तीय बाजार के जानकारों का मानना है कि बैंकों के पास नकदी की अत्यधिक उपलब्धता को देखते हुए इस ऑक्शन में शत-प्रतिशत भागीदारी देखने को मिलेगी। इस कदम से बाजार में अतिरिक्त पैसों का प्रवाह थमेगा और अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनी रहेगी।

