छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के पांढुर्णा और सावरगांव के बीच सदियों पुरानी और खतरनाक परंपरा ‘गोटमार’ मेला इस साल आगामी 11 सितंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस खूनी खेल में जाम नदी के बीच गाड़े गए झंडे को अपने कब्जे में लेने के लिए दोनों गांवों के लोग एक-दूसरे पर अंधाधुंध पत्थर बरसाते हैं, जिसमें अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है। इस बार सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करते हुए जिला प्रशासन ने घातक साबित होने वाली ‘गोफन’ (रस्सी वाली गुलेल) के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी है, ताकि हिंसा और गंभीर चोटों के खतरे को कम किया जा सके।
तीन सदियों पुराना इतिहास और प्रेम प्रसंग से जुड़ी खूनी परंपरा की कहानी
स्थानीय मान्यताओं और जानकारों के अनुसार, गोटमार की यह परंपरा करीब 17वीं सदी यानी 300 साल पुरानी है, जो दो गांवों के बीच एक प्रेमी युगल की दुखद प्रेम कहानी और संघर्ष से जुड़ी हुई है। इतिहास में अब तक इस जानलेवा खेल के दौरान 14 लोगों की मौत हो चुकी है और हर साल सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं। हालांकि प्रशासन ने समय-समय पर इसके स्वरूप को बदलने और प्लास्टिक की गेंदें इस्तेमाल करवाने के कई प्रयास किए, लेकिन ग्रामीण परंपरा का हवाला देकर आज भी पत्थरों से ही यह खूनी मुकाबला खेलते आ रहे हैं।
प्रशासन ने तैनात किया भारी पुलिस बल, शांतिपूर्ण आयोजन की अपील
मेले को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ और पुलिस प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। मेला स्थल पर लगभग 600 पुलिसकर्मियों का भारी बल तैनात किया जाएगा, जिसमें कुछ जवान सिविल ड्रेस में भी रहकर हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखेंगे। इसके अलावा, किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मौके पर मेडिकल टीमों और एंबुलेंस की मुस्तैदी सुनिश्चित की गई है, साथ ही प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे जनहानि से बचते हुए केवल प्रतीकात्मक रूप से इस परंपरा का पालन करें।

