बेंगलुरु, कांग्रेस की एसटी इकाई के पूर्व उपाध्यक्ष टी.आर. रामप्पा की शिकायत पर बेंगलुरु के विधान सौधा पुलिस स्टेशन में यह जीरो एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने यह कानूनी कार्रवाई ‘नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955’, ‘एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989’ और ‘भारतीय न्याय संहिता (BNS)’ की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गत 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद स्थानीय बीजेपी नेताओं ने केवल इसलिए ‘शुद्धिकरण पूजा’ की क्योंकि वे अनुसूचित जाति से आते हैं।
खड़गे का कड़ा विरोध और डॉ. अंबेडकर के महाड सत्याग्रह से तुलना
इस अपमानजनक घटना को लेकर संसद से लेकर सड़क तक तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। राज्यसभा में यह मुद्दा उठाते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन के नेता जेपी नड्डा को पत्र लिखकर एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी पर सवाल उठाए थे। उन्होंने इस अनुष्ठान को संविधान की भावना के खिलाफ और स्पष्ट रूप से छुआछूत से जुड़ा कृत्य करार दिया, जिसकी तुलना उन्होंने डॉ. बीआर अंबेडकर के ऐतिहासिक 1927 के महाड सत्याग्रह से करते हुए तीखा विरोध जताया था।
देशभर में दर्ज हुई कई एफआईआर और राजनीतिक दलों के बीच तेज हुआ घमासान
इस पूरे विवाद के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों में लगभग आठ स्थानों पर समान मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिसमें उत्तराखंड के नैनीताल इलाके के भाजपा नेताओं और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। दूसरी ओर, हल्द्वानी पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ भी एक शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने इस सामान्य धार्मिक अनुष्ठान को जानबूझकर जातिवादी रंग दिया। इस घटनाक्रम के बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक टकराव और अधिक गहरा गया है।

