शी जिनपिंग को दो बार आ चुका है हार्ट अटैक, बिगड़ती सेहत और तख्तापलट की अटकलों से चीन में बढ़ी राजनीतिक चिंता

तिब्बत, तिब्बत के पूर्व पीएम लोबसांग सांगे ने बड़ा खुलासा किया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को दो बार हार्ट अटैक आ चुका है, जिससे चीन में राजनीतिक अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सेहत को लेकर एक बार फिर गंभीर दावे सामने आए हैं। तिब्बत की निर्वासित सरकार के पूर्व प्रधानमंत्री लोबसांग सांगे ने दावा किया है कि जिनपिंग हाल के समय में कम से कम दो बार गंभीर हार्ट अटैक या हार्ट स्ट्रोक का सामना कर चुके हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

सांगे के मुताबिक, शी जिनपिंग की कथित स्वास्थ्य समस्याओं का असर उनके कामकाज और फैसलों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने चीन के राजनीतिक नेतृत्व में बढ़ते अविश्वास, आंतरिक कलह और संभावित तख्तापलट की आशंकाओं की ओर भी इशारा किया है।

सार्वजनिक मंचों से अचानक गायब होने का दावा
लोबसांग सांगे का दावा है कि शी जिनपिंग कई बार बिना किसी पूर्व सूचना के सार्वजनिक कार्यक्रमों से अचानक गायब हो जाते हैं। सांगे ने इन घटनाओं को जिनपिंग की कथित स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ते हुए कहा कि उन्हें शारीरिक कमजोरी और ‘मेंटल फॉग’ जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

उनका यह भी दावा है कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण जिनपिंग के फैसलों में असामान्य और अप्रत्याशित रवैया दिखाई दे रहा है। इसी संदर्भ में शीर्ष सैन्य अधिकारियों और वरिष्ठ मंत्रियों को अचानक हटाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

हालांकि, इन दावों को लेकर चीन की ओर से किसी स्वतंत्र चिकित्सा रिपोर्ट या आधिकारिक पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इन बातों को फिलहाल दावों और अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।

क्या है Emperor’s Dilemma?
सांगे ने चीन की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को समझाने के लिए ‘Emperor’s Dilemma’ यानी ‘सम्राट की दुविधा’ का जिक्र किया। इसके मुताबिक, लंबे समय तक सत्ता में रहने वाला निरंकुश शासक उत्तराधिकारी घोषित करने से बच सकता है, क्योंकि उसे आशंका रहती है कि भविष्य का उत्तराधिकारी ही उसके खिलाफ सत्ता की चुनौती खड़ी कर सकता है।

शी जिनपिंग के संदर्भ में भी यही सवाल उठाया जा रहा है कि अगर उनकी सेहत अचानक गंभीर रूप से बिगड़ती है और स्पष्ट उत्तराधिकारी मौजूद नहीं होता, तो चीन में सत्ता को लेकर संघर्ष बढ़ सकता है।

ऐसी स्थिति में कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर गुटबाजी और सत्ता संघर्ष तेज होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, गृहयुद्ध या व्यापक नागरिक अशांति की संभावना फिलहाल केवल एक सैद्धांतिक आशंका है, जिसकी पुष्टि नहीं हुई है।

माओ से बड़ी विरासत की चाह का दावा
लोबसांग सांगे ने यह भी दावा किया कि शी जिनपिंग अपने पिता शी झोंगशुन के अपेक्षाकृत उदार विचारों से दूर होकर अधिक कठोर नेतृत्व शैली अपना चुके हैं। उनके अनुसार, जिनपिंग अपनी सत्ता और राजनीतिक विरासत को मजबूत करने पर विशेष जोर देते हैं।

सांगे का आरोप है कि जिनपिंग इतिहास में माओत्से तुंग से भी बड़ी विरासत बनाने की महत्वाकांक्षा रखते हैं। इसी वजह से तिब्बत को लेकर उनकी नीतियों को भी वह आक्रामक मानते हैं।

चीन की राजनीति पर नजर
शी जिनपिंग की सेहत से जुड़े ये दावे ऐसे समय सामने आए हैं जब चीन की सत्ता संरचना और शीर्ष नेतृत्व में होने वाले बदलावों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार नजर रहती है। अगर भविष्य में उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने आती है, तो उसका चीन की घरेलू राजनीति और क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ सकता है।

फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हार्ट अटैक, स्ट्रोक, मानसिक स्वास्थ्य और तख्तापलट से जुड़े लोबसांग सांगे के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें पुष्ट तथ्य के बजाय राजनीतिक दावे और संभावित अटकलों के रूप में देखना जरूरी है।

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