गुना: डिजिटल दुनिया में ठगी के रोज नए तरीके सामने आ रहे हैं, लेकिन शॉपिंग प्लेटफॉर्म अमेजन की रिफंड पॉलिसी में सेंध लगाकर करोड़ों का नेटवर्क खड़ा कर देने वाला यह मामला होश उड़ा देने वाला है। बिना एक भी रुपया जेब से खर्च किए ब्रांडेड महंगे फोन हासिल करना, कंपनी से पूरा रिफंड अपने खाते में वापस ले लेना और फिर उन्हीं फोनों को बाजार में बेचकर नोट छापना—यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि साइबर ठगी का एक ऐसा शातिर खेल है जिसका पर्दाफाश पुलिस ने किया है।
इस हाई-टेक फर्जीवाड़े की परतें तब खुलना शुरू हुईं जब एक पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित को 65 हजार रुपये कीमत का वनप्लस मोबाइल महज 45 हजार रुपये में दिलाने का झांसा देकर 12 हजार रुपये एडवांस ऐंठ लिए गए। जब न फोन मिला और न ही रुपये वापस हुए, तो मामला पुलिस तक पहुंचा। संदिग्ध मुख्य आरोपी शेखर मीना को हिरासत में लेकर जब सख्ती से पूछताछ की गई, तो जो सच निकलकर बाहर आया उसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया।
रिफंड खेल का मास्टरप्लान: जानिए कैसे होता था खेल
ठगी का यह पूरा ताना-बाना बेहद सुनियोजित तरीके से बुना गया था। फर्जी पहचान और फर्जी नंबरों के दम पर यह गिरोह पूरा नेटवर्क चला रहा था।
फर्जी पहचान का जाल: आरोपी सबसे पहले फर्जी नामों और अलग-अलग मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करके अमेजन पर फर्जी यूजर अकाउंट तैयार करते थे।
ऑर्डर और होल्ड का दांव: इन फर्जी अकाउंट्स से महंगे स्मार्टफोन का ऑनलाइन प्री-पेड भुगतान करके ऑर्डर दिया जाता था। जैसे ही डिलीवरी बॉय पार्सल लेकर पहुंचता, आरोपी खुद को घर पर न होने का बहाना बनाकर डिलीवरी होल्ड करा देते थे।
रिफंड भी और पार्सल भी: पार्सल होल्ड होते ही अमेजन की रिफंड प्रक्रिया का फायदा उठाकर ऑर्डर का पूरा पैसा अपने बैंक खाते में वापस ले लिया जाता था। इसके तुरंत बाद कूरियर कंपनी के कर्मचारियों से सांठगांठ कर उसी मोबाइल का पार्सल भी चुपके से हासिल कर लिया जाता था। यानी पैसा भी वापस और फोन भी जेब में!
टेलीकॉम कर्मचारी और कूरियर का मिलाभगत
जब भी कोई फर्जी अकाउंट संदिग्ध गतिविधियों के कारण ब्लॉक होता, तो यह गिरोह नया पैंतरा आजमाता। जांच में सामने आया कि एक टेलीकॉम कंपनी का कर्मचारी इस गिरोह को धड़ाधड़ नए सिम कार्ड और ओटीपी मुहैया कराता था, जिससे मिनटों में नए फर्जी अमेजन अकाउंट बनकर तैयार हो जाते थे।
बाजार में खपाते थे चोरी के फोन, खरीदी 35 लाख की ईवी कार
मुफ्त में हथियाए गए इन महंगे स्मार्टफोनों को आरोपी अपने परिचित मोबाइल दुकानदारों और अन्य खरीदारों को सस्ते दामों में बेच देते थे। इस काली कमाई को वैध बनाने के लिए परिवार के सदस्यों और जान-पहचान वालों के बैंक खातों का उपयोग किया जाता था। ठगी के इस पैसे से आरोपियों ने ऐशो-आराम की जिंदगी जी और 35 लाख रुपये की लग्जरी ईवी कार तक खरीद ली।
14 लोगों पर शिकंजा, 37 लाख का सामान जब्त
इस अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी शेखर मीना (निवासी ग्राम विलौदा, बमौरी) और उसके साथी तरुण शर्मा (निवासी राघौगढ़) को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 35 लाख रुपये की ईवी कार और 2 लाख रुपये के दो प्रीमियम स्मार्टफोन सहित कुल 37 लाख रुपये का सामान बरामद किया है।
मामले में कुल 14 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों को अदालत से रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि अब तक कितने फोनों का चूना अमेजन को लगाया गया है और इस नेटवर्क की जड़ें कहां तक फैली हैं।
