पेंशन बंद होने से वृद्धाएं हो रही परेशान, कहीं नहीं हो रही सुनवाई

इंदौर: सरकार बुजुर्गों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए हर महीने 600 रुपए देती है लेकिन सवाल यह है कि जब पात्र बुजुर्गों ने बार-बार केवाईसी कराई, आवेदन दिए और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे तो आखिर उनकी पेंशन क्यों नहीं लौट रही?वृद्धावस्था पेंशन के नाम पर सरकार भले ही सामाजिक सुरक्षा का दावा करे लेकिन पाटनीपुरा क्षेत्र के लालपुरा में सामने आए मामले इन दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं.

यहां कुछ बुजुर्ग महिलाओं की पेंशन पिछले पांच वर्षों से बंद है जबकि कुछ की पेंशन चार महीने से अटकी हुई है. हैरानी यह कि हितग्राहियों का कहना है कि उन्होंने कई बार केवाईसी कराई, आवेदन दिए और पार्षद से लेकर नगर निगम तथा बैंक तक के चक्कर लगाए फिर भी पेंशन शुरू नहीं हुई. एक बीपीएल परिवार की दिव्यांग बालिका की पेंशन भी वर्षों से बंद होने की बात सामने आई है. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक मध्यप्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत पात्र वृद्ध दिव्यांग सहित अन्य हितग्राहियों को 600 रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं.

वहीं सरकार के ही 2025 के दस्तावेज में करीब 56 लाख पेंशन हितग्राहियों में से करीब 3.50 लाख की ई-केवाईसी सत्यापित नहीं होने की बात सामने आई थी, बाद के विभागीय पत्र में पोर्टल पर ई-केवाईसी की तकनीकी समस्याओं का भी उल्लेख किया गया तो सवाल यह है कि जब केवाईसी कराने के बाद भी पेंशन नहीं मिल रही तो जिम्मेदारी किसकी है? क्या सरकारी व्यवस्था में ऐसी कोई प्रभावी निगरानी नहीं है जो पात्र बुजुर्ग की पेंशन बंद होने के बाद स्वतः कारण बताए और समाधान सुनिश्चित करे? महंगाई के दौर में 600 रुपए भले बड़ी रकम न हो लेकिन इन बुजुर्गों के लिए यही छोटी राशि दवा, राशन और रोजमर्रा की जरूरतों का सहारा थी. आखिर पात्रता होने के बावजूद इस सहारे को रोकने का जवाब कौन देगा?

इनका कहना है
पांच महीने हो चुके हैं. मेरी पेंशन बंद हो गई है. दो बार झोन पर जा चुकी हूं. लेकिन अभी तक पेंशन चालू नहीं की गई. अब किसके पास जाऊं पता नहीं.
– शकुंतला बाई मरमट
बेटी दिव्यांग है उसको पेंशन मिल रही थी लेकिन पिछले कुछ वर्षों से अचानक बिना कुछ बोले पेंशन बंद कर दी. बैंक के चक्कर लगा दिए लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ.
– मुन्नी बाई वर्मा
पेंशन बंद हुए इतने वर्ष बीत गए कि मुझे अब तो याद भी नहीं. शुरू-शुरू में सब दूर चक्कर लगाए, केवाईसी करवाई लेकिन कुछ नहीं हुआ तो मैंने भी आस छोड़ दी.
– आशा बाई जाटवा

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