रिलायंस ऐशडाईक की तकनीकी जांच शुरू 

सिंगरौली । रिलायंस सासन पावर की क्षतिग्रस्त ऐशडाईक से उत्पन्न स्थिति और इसके संभावित प्रभावों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर गौरव बैनल द्वारा म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को विस्तृत तकनीकी एवं पर्यावरणीय जांच के लिए प्रतिवेदन भेजा गया था। कलेक्टर के प्रतिवेदन को गंभीरता से लेते हुए म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ऐशडाईक की तकनीकी एवं पर्यावरणीय जांच के लिए विषय विशेषज्ञों की एक्सपर्ट कमेटी गठित की है।

गठित विशेषज्ञ समिति आज गुरुवार को सिंगरौली पहुंची और रिलायंस सासन पावर की ऐशडाईक का स्थल निरीक्षण करते हुए विस्तृत तकनीकी जांच शुरू की। विशेषज्ञ समिति द्वारा ऐशडाईक के मूल डिजाइन, संरचनात्मक व्यवस्था, निर्माण कार्य तथा स्वीकृत डिजाइन के अनुरूप उसके क्रियान्वयन की स्थिति का परीक्षण किया जा रहा है। इसके साथ ही ऐशडाईक के संचालन की कार्यप्रणाली और निर्धारित सुरक्षा मानकों के पालन की भी गहनता से जांच की जाएगी। यहां बताते चले कि रिलायंस सासन पावर का हर्रहवा में बने ऐशडाईक क्षतिग्रस्त भी हो चुका है और उसका मलवा भी कई बार बह कर घरों एवं खेतो में पहुंचा है। यहां के प्रभावित ग्रामीण एवं किसान 5 सितम्बर को जल सत्याग्रह करने का ऐलान भी किया है। जिसको लेकर कंपनी प्रबंधन की सांसे फुली हुई हैं।

विशेषज्ञ समिति को पूरी निष्पक्षता से जांच करने के निर्देश

कलेक्टर गौरव बैनल ने विशेषज्ञ समिति को जांच पूरी निष्पक्षता, पारदर्शिता और निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान ऐशडाईक के डिजाइन, निर्माण, क्रियान्वयन अथवा संचालन में किसी भी प्रकार की तकनीकी कमी या लापरवाही सामने आती है तो आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। संबंधित प्रबंधन को निर्धारित समय-सीमा में आवश्यक सुधारात्मक कार्य पूरे करने के निर्देश भी दिए जाएंगे। जिला प्रशासन द्वारा ऐशडाईक से संबंधित स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने पर्यावरणीय सुरक्षा, जनसुरक्षा और प्रभावित क्षेत्रों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विशेषज्ञ समिति की जांच और उसकी अनुशंसाओं के आधार पर आगे की आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही है।

विशेषज्ञ समिति अपनी अनुशंसाएं करेगी प्रस्तुत 

विशेषज्ञों द्वारा ऐशडाईक के क्षतिग्रस्त होने के कारणों और उससे उत्पन्न परिस्थितियों का तकनीकी आकलन किया जाएगा। आसपास के क्षेत्रों में हुए जलभराव, जल की गुणवत्ता तथा पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का भी स्थल निरीक्षण कर परीक्षण किया जाएगा। समिति यह भी जांच करेगी कि वर्तमान संरचना के कारण भविष्य में जनहानि, संपत्ति की क्षति अथवा पर्यावरणीय नुकसान की कोई संभावित स्थिति तो नहीं है। जांच के दौरान ऐशडाईक की संरचनात्मक एवं तकनीकी कमियों, यदि कोई पाई जाती हैं, तो उनका भी परीक्षण किया जाएगा। साथ ही प्रभावित एवं आसपास के क्षेत्रों को भविष्य में सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक सुधारात्मक एवं निवारक उपायों के संबंध में विशेषज्ञ समिति अपनी अनुशंसाएं प्रस्तुत करेगी।

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