बीस हजार की रिश्वत लेते रंगे हथ धराए डिप्टी रेंजर व बीट गार्ड

 परसमनियां वन चौकी का मामला, लोकायुक्त रीवा ने की कार्रवाई, डिप्टी

रेंजर के घर से 1 लाख व अवैध पिस्टल भी बरामद

सतना :व्यवस्था की निगरानी करने के लिए शासकीय स्तर पर तैनात कुछ कल-पुर्जों की धन-पिपासा ने गिद्ध को भी पीछे छोड़ दिया है. अमूमन गिद्ध तभी मंडराते हैं जब उन्हें मृत जानवर नजर आते हैं, लेकिन कुछ शासकीय कल-पुर्जे ऐसे हैं, जो जीते-जागते इंसान को नोचने-खसोटने में कोई कसर नहीं छोड़ते. जिले के उचेहरा क्षेत्र की परसमनियां वन चौकी में तैनातडिप्टी रेंजर और बीट गार्ड को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद जोकहानी सामने आई, वह लगभग यही पुष्टि करती है.

पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त रीवा गोपाल सिंह धाकड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि नल-जल योजना के अंतर्गत पाइप लाइन बिछाने का काम करने वाले पेटी कान्ट्रैक्टर मुन्नू पाण्डेय पिता विष्णु निवासी ग्राम महाराज कुरेशी उचेहरा द्वारा 25 मई को इस बात की शिकायत की गई थी कि परसमनियां वन चौकी में तैनात डिप्टी रेंजर धीरेंद्र चतुर्वेदी, बीट गार्ड अनिल मांझी व नीरज दुबे उससे रिश्वत मांग रहे हैं. इस शिकायत की तस्दीक करने के लिए शिकायतकर्ता मुन्नू ने बतौर एडवांस 5 हजार रु की रिश्वत दी और उसकी रिकार्डिंग लोकायुक्त को सौंप दी. शिकायत की तस्दीक होते ही एसपी लोकायुक्त ने ट्रैप कार्रवाई करने की रणनीति तैयार करते हुए उप पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त राजेश पाठक, निरीक्षक प्रमेंद्र कुमार, उनि रितुका शुक्ला के नेतृत्व में 15 सदस्यीय दल को रवाना कर दिया.

शुक्रवार की सुबह परसमनियां वन चौकी में जाकर मुन्नू ने जैसे ही रिश्वत के 20 हजार रु सौंपने के बाद इशारा किया. वैसे ही तैयार लोकायुक्त टीम ने डिप्टी रेंजर धीरेंद्र चतुर्वेदी व बीट गार्ड अनिल मांझी को रंगे हाथ दबोच लिया. इसके साथ ही बीट गार्ड नीरज दुबे को भी हिरासत में ले लिया गया. इसी कड़ी में लोकायुक्त की टीम ने डिप्टी रेंजर के घर में भी दबिश दी. जहां पर 1 लाख रु की नकदी के साथ ही एक पिस्टल भी बरामद हुई. बरामद पिस्टल के संबंध में डिप्टी रेंजर द्वारा कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया जा सका.जिसे देखते हुए लोकायुक्त टीम ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम व आम्र्स एक्ट के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की.

अवैध तरीके से किया परेशान
एसपी लोकायुक्त श्री धाकड़ ने बताया कि नल-जल योजना के अंतर्गत पाइप लाइन बिछाने का कार्य एल एण्ड टी कंपनी को मिला हुआ है. जिसका कुछ काम पेटी कांट्रैक्टर के तौर पर मुन्नू पाण्डेय द्वारा कराया जा रहा है. चूंकि पाइप लाइन बिछाने का कुछ कार्य वन भूमि में भी कराया जाना था. लिहाजा इस कार्य के लिए वन विभाग की एनओसीभी ठेकेदार द्वारा ली जा चुकी थी. वहीं कलेक्टर सतना द्वारा जारी आदेश में दी जाने वाली सभी अनुमति का स्पष्ट उल्लेख भी था.

लेकिन इसके बावजूद भी पहाड़ी-परसमनियां मार्ग पर पाइप खुदाई कराए जाने के दौरान डिप्टी रेंजर व बीट गार्ड वहां पहुंच गए.डिप्टी रेंजर ने न सिर्फ काम रुकवा दिया बल्कि अवैध तरीके से जेसीबी भी जब्त कर ली. इसी कड़ी में वन विभाग की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की धौंस भी दी जाने लगी. जिसके एवज में पहले 5 लाख की रिश्वत मांगी जाने लगी. सौदेबाजी हुई तो रकम घटकर 1 लाख पर आ गई. लेकिन ठेकेदार ने अपनी परेशानी का हवाला देते हुए किसी तरह रिश्वत की रकम को 30 हजार रु तय करवा ली. जिसकी पहली किश्त के तौर पर 5 हजार रु भी सौंप दिए.

पहले भी राजसात कराया था डंपर

शिकायतकत्र्ता मुन्नू पाण्डेय ने बताया कि लगभग दो साल पहले इन्हीं डिप्टी रेंजर द्वारा उनका एक डंपर रेवेन्यू से पकड़कर राजसात करा दिया गया था. केस रीवा कोर्ट में चल रहा है, जिसकी फाइल जांच के लिए एसडीओ के पास आई. जिसकी जानकारी मिलते ही डिप्टी रेंजर त्रिपाठी एक बार फिर मुन्नू के पास पहुंचे और जांच में अपने बयान से पलट जाने की पेशकश करते हुए उसके एवज में 50 हजार रु मांगे. यह सुनकर मुन्नू ने कहा कि वह 50 हजार दे देगा लेकिन पहले उसकी जेसीबी छोड़ दी जाए. जिस पर डिप्टी रेंजर ने कहा कि जेसीबी छोडऩे के लिए 5 लाख अलग से देने पड़ंगे. मुन्नू के अनुसार डिप्टी रेंजर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए न सिर्फ उसे हर कार्य में अड़ंगा डाला बल्कि उसके सारे संसाधनों पर भी अवैध तौर पर कब्जा जमा लिया. चौतरफा परेशानी से घिरने के कारण उसके पास लोकायुक्त में शिकायत करने के अलावा और कोई चारा नहीं बच था.

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