भोपाल। पुलिस मुख्यालय स्थित अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय विशेष फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल अनुसंधान प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन अपराध विवेचना को अधिक वैज्ञानिक, आधुनिक और साक्ष्य आधारित बनाने के उद्देश्य से गहन तकनीकी एवं व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए।
कार्यशाला का आयोजन विशेष पुलिस महानिदेशक पंकज श्रीवास्तव के निर्देशन में किया जा रहा है। उप पुलिस महानिरीक्षक साकेत पांडे एवं प्रशांत खरे के मार्गदर्शन तथा सहायक पुलिस महानिरीक्षक मनीष खत्री के समन्वय में प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित हो रहा है।
क्षेत्रीय एवं राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारियों ने साक्ष्य संकलन, संरक्षण और परीक्षण के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञ प्रशिक्षण दिया। डॉ. पूनम सिंह ने फॉरेंसिक भौतिकी एवं वॉयस एविडेंस प्रबंधन पर जानकारी दी, जबकि डॉ. राजीव दुआ ने रासायनिक, मादक पदार्थ एवं विष विज्ञान संबंधी नमूनों के संग्रहण और संरक्षण की प्रक्रियाओं को समझाया।
डॉ. कमलेश कैथोलिया ने जैविक, सीरोलॉजिकल एवं डीएनए साक्ष्यों, चेन ऑफ कस्टडी और डीएनए प्रोफाइलिंग पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। डॉ. प्रीति गायकवाड़ ने अपराध स्थल प्रबंधन तथा क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन किट के उपयोग का व्यावहारिक प्रदर्शन किया।
अंतिम सत्र में एसएफएसएल, सागर के रामदा कनेश ने बैलिस्टिक साक्ष्य, आग्नेयास्त्रों, कारतूसों, गोलियों और गनशॉट रेजिड्यू से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी।
कार्यशाला का समापन 3 सितम्बर को होगा, जिसमें उप पुलिस अधीक्षक अमिताभ तिवारी अपराध स्थल फोटोग्राफी, डिजिटल साक्ष्यों की प्रस्तुति और उनकी न्यायिक प्रमाणिकता पर विशेष सत्र लेंगे।
