देहरादून, (वार्ता) उत्तराखंड में पंजीकृत 400 से अधिक मदरसों में से केवल 26 ने 31 जुलाई से प्रभावी राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से संबद्धता के लिए आवेदन किया है। राज्य सरकार ने संबद्धता नहीं लेने वाले मदरसों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को प्राधिकरण से संबद्ध इन 26 मदरसों को मान्यता प्रमाणपत्र वितरित किये। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा 26 शिक्षण संस्थानों को मान्यता देना राज्य में अल्पसंख्यक समुदाय की शिक्षा व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
श्री धामी ने कहा कि सरकार शिक्षा को आधुनिक और समान स्वरूप देने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि परंपराओं का अपना महत्व है, लेकिन वर्तमान समय विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संचालित है। इसलिए बच्चों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना जरूरी है, ताकि वे बदलती वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सकें।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों के व्यक्तित्व का विकास, प्रतिभा को निखारना और उन्हें बेहतर भविष्य के लिए तैयार करना होना चाहिए। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से विद्यार्थी डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी, लेखक और वैज्ञानिक बनने का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। कृषि क्षेत्र में जाने वाले विद्यार्थी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर बेहतर परिणाम दे सकते हैं।
इस अवसर पर नवमान्यता प्राप्त मदरसों के लिए “नयी पहचान, नया सम्मान : आधुनिक शिक्षा से उज्ज्वल भविष्य” विषय रखा गया।
इस बीच, संबद्धता लेने से इनकार करने वाले मदरसों के खिलाफ राज्य सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि कुछ मदरसों को सील कर दिया गया है और अन्य दोषी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई प्रक्रिया में है।
