सतना: जिले में हरछठ व्रत संतान की सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना से माताओं द्वारा रखा जाता है। यह पर्व भगवान बलराम को समर्पित होता है। और अपने संतान की खुशहाली की कामना करती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म हुआ था। इस अवसर पर माताएं निर्जला या अपनी परंपरा के अनुसार व्रत रखकर षष्ठी माता की पूजा करती हैं और व्रत कथा सुनती हैं।
जानकारी के अनुसार, इस वर्ष षष्ठी तिथि 2 सितंबर की सुबह 6:12 बजे से 3 सितंबर की सुबह 4:25 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार हरछठ व्रत 2 सितंबर को ही रखा जाएगा। इस दिन पूजा में विशेष रूप से हल से जुड़ी चीजों का त्याग किया जाता है।
हल से जुड़ी उपज का सेवन नहीं
हरछठ व्रत में ऐसी खाद्य सामग्री खाने की परंपरा नहीं है, जिसे खेत में हल चलाकर उगाया गया हो। इसलिए इस दिन गेहूं, चावल, दाल और खेत में उगी सब्जियों सहित हल से जुड़ी उपज से परहेज किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में हल को भगवान बलराम का प्रमुख अस्त्र माना गया है। साथ ही गाय के दूध और उससे बने पदार्थों का सेवन भी वर्जित माना जाता है।
पूजा में इन सामग्रियों का होता है उपयोग
हरछठ की पूजा के लिए भैंस का दूध, दही, घी, गोबर, महुए के फल-फूल और पत्ते, पसही चावल, सात प्रकार के अनाज, मिट्टी के कुल्हड़, मटकी, ज्वार की धानी, धान का लावा, भुना चना और घी में भुना महुआ आदि सामग्री रखी जाती है। इसके अलावा, देवली-छेवली, लाल चंदन, हल्दी, कुश और मिट्टी का दीपक भी पूजा में उपयोग किया जाता है।
