नई दिल्ली, एस्सल ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा के व्यक्तिगत दिवालियापन मामले में NCLT ने बड़ा कदम उठाते हुए अपने पूर्व आदेश पर रोक लगा दी है। जस्टिस (रिटायर्ड) अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय विशेष बेंच ने स्पष्ट किया कि पिछले फैसले पर कोई स्पष्ट बहुमत नहीं बन पाया था, जिसके चलते मामले की सुनवाई अब नए सिरे से की जाएगी।
सॉलिडिटर जनरल की अपील पर संपत्ति बेचने और ट्रांसफर पर रोक
क्रेडिटर्स की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों पर गौर करते हुए ट्रिब्यूनल ने सुभाष चंद्रा को अपनी किसी भी संपत्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बेचने अथवा अन्यत्र स्थानांतरित करने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। यह निर्देश गारंटर और ऋणदाताओं से जुड़े हितों की सुरक्षा के मद्देनजर दिया गया है।
22 हजार करोड़ के दावों के मुकाबले मामूली भुगतान का विवाद
यह पूरा कानूनी मामला लगभग 22,006.57 करोड़ रुपये के कुल दावों के एवज में बेहद मामूली यानी मात्र 6.5 करोड़ रुपये के पुनर्भुगतान प्रस्ताव से जुड़ा हुआ है। शुरुआती दो-सदस्यीय बेंच में आम सहमति न बनने और तीसरे सदस्य के फैसले पर मतभेद उभरने के बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले को पांच सदस्यों वाली विस्तारित बेंच के पास सौंपा गया था।

