इंदौर:मेट्रो अंडर ग्राउंड की पूर्व योजना में बदलाव को लेकर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मेट्रो अंडर ग्राउंड लाइन को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता ने हाईकोर्ट में स्थगन आवेदन लगाया है, जिसमें याचिकाकर्ता किशोर कोडवानी ने कहा कि मेट्रो की पूर्व एलिवेटेड से अंडर ग्राउंड में काफी बदलाव है. पूर्व में मेट्रो रेल के लिए अक्टूबर 2024 में गजट नोटिफिकेशन में संशोधन करना अनिवार्य है. मेट्रो के नए भूमिगत लाइन प्लान से शहर के हजारों मकान प्रभावित होंगे.
याचिकाकर्ता किशोर कोडवानी ने स्थगन आवेदन पर तर्क रखते हुए उक्त बिंदुओं पर हाईकोर्ट में पक्ष रखा. याचिकर्ता कोडवानी ने हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया कि मेट्रो अण्डर ग्राउण्ड की पूर्व योजना में काफी बदलाव किया है और इसलिए 22/8/2024 का गजट संशोधन करना अनिवार्य है. नये प्लान के कारण 20 से 25 हजार भवन प्रभावित होगें, जो किसी को ज्ञात नहीं हैं.
याचिका में कोडवानी ने मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर हाईकोर्ट सुनवाई में तर्क रखे. पहला प्रस्ताव किसका है? दूसरा धरोहर के तीन सौ मीटर में निर्माण हेतु राष्ट्रपति अनुमति गजट नोटिफिकेशन नहीं और तीसरा भूमिगत पानी लेयर विखंडित होगी. कोडवानी हाईकोर्ट में भूमिगत जल विखंडित होने का तर्क रखते हुए बताया कि उत्तर दिशा 650 व दक्षिण दिशा 555 मीटर मध्य रेखा में एम.जी.रोड पर मेट्रो रेल अंडर ग्राउंड 80 मीटर नीचे डाली जा रहीं है. योजना के लिए पर्यावरण अनुमति नहीं ली गई है. उक्त मामले में जिला दंडाधिकारी ने कोई निर्णय नहीं है. उक्त तर्कों को लेकर न्यायधीश ने अंडर ग्राउंड मेट्रो रेल स्टेटस की परिवर्तित रिपोर्ट अगले हफ्ते सुनवाई में प्रस्तुत करने के आदेश दिए.
