जबलपुर: गांवों को विवादमुक्त बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे विवादों का स्थानीय स्तर पर सहज समाधान सुनिश्चित करने की दिशा में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर ने सार्थक पहल की है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधिपति एवं मुख्य संरक्षक, मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण न्यायमूर्ति विवेक रूसिया के संरक्षण तथा प्रधान जिला न्यायाधीश के मार्गदर्शन में सुदूर ग्रामीण अंचलों से चयनित समाजसेवियों एवं ऊर्जावान व्यक्तियों के लिए 20 घंटे का सामुदायिक मीडिएशन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया। यह प्रशिक्षण 1 से 3 सितंबर तक जबलपुर के स्पोर्ट्स क्लब में आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय परंपरा के अनुसार मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव सुश्री सुमन श्रीवास्तव ने कहा कि जहां एक से अधिक लोग होंगे, वहां मतभेद और विवाद होना स्वाभाविक है, लेकिन संवाद और मध्यस्थता के जरिए उनका समाधान भी संभव है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक मध्यस्थता का उद्देश्य ग्रामीण अंचलों में होने वाले छोटे-मोटे विवादों को सहज और व्यवहारिक तरीके से सुलझाकर लोगों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है।
सहज और सरल तरीके से न्याय मिले
प्रशिक्षण में एमसीपीसी सीनियर ट्रेनर रीमा भंडारी, एसोसिएट ट्रेनर एवं सेवानिवृत्त प्रधान जिला न्यायाधीश भावना साधौ, अतिरिक्त सचिव सालसा अरविंद श्रीवास्तव, उप सचिव अनिरुद्ध जैन, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शक्ति वर्मा सहित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर प्रशिक्षित मध्यस्थों की मदद से विवादों को बढ़ने से पहले ही बातचीत और आपसी सहमति के जरिए समाप्त करना है, ताकि गांवों में सौहार्द कायम हो और लोगों को सहज, सरल एवं सस्ता न्याय मिल सके।
