दुनिया में प्राकृतिक खेती उत्पादों की बढ़ती मांग भारत के किसानों के लिए बड़ा अवसर : शिवराज सिंह चौहान

नयी दिल्ली, 01 सितंबर (वार्ता) केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि विश्वभर में प्राकृतिक एवं रसायन-मुक्त कृषि उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और किसानों के पास इस बढ़ती मांग का लाभ उठाने का बड़ा अवसर है। उन्होंने यह बात मंगलवार को यहां प्राकृतिक खेती से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों एवं राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन की प्रगति की समीक्षा बैठक में कही। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादित वस्तुओं की ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन, प्रमाणन तथा बाजार संपर्क को मजबूत कर किसानों की आय में इजाफा किया जा सकता है।बैठक में प्राकृतिक खेती के विस्तार, किसानों के पंजीकरण एवं प्रमाणन, किसान उत्पादक संगठनों तथा प्राकृतिक खेती के आर्थिक असर पर चर्चा की गई।

बैठक के दौरान श्री चौहान ने कहा कि प्राकृतिक खेती को केवल एक तरीके के रूप में नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने के रूप में विकसित करना होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती से किसानों को होने वाले वास्तविक लाभों का व्यापक एवं वैज्ञानिक आकलन किया जाए। प्राकृतिक खेती से किसानों की आमदनी का भी अध्ययन किया जाना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि कि प्राकृतिक खेती किसानों के लिए कैसे लाभकारी हो रही है।

बैठक में किसानों के पंजीकरण और प्रमाणन की प्रगति की समीक्षा की गई। बताया गया कि 80,034 किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 100 प्राकृतिक खेती आधारित एफपीओ तथा 162 जैविक खेती आधारित एफपीओ सहित कुल 262 एफपीओ प्रमाणन प्रणाली से जुड़े हैं। इस दौरान प्रमाणन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने, किसानों की बाजार तक पहुंच बढ़ाने तथा एफपीओ के माध्यम से प्राकृतिक खेती उत्पादों के विपणन को मजबूत करने पर चर्चा हुई। विभिन्न राज्यों में विकसित सफल विपणन मॉडलों और किसानों को बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने की पहलों की भी समीक्षा की गई।

बैठक में नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत प्राकृतिक खेती की प्रगति की भी समीक्षा की गई। प्रस्तुति में बताया गया कि बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के 45 जिलों में 777 क्लस्टरों के माध्यम से 97,125 किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा गया है तथा 38,850 हेक्टेयर क्षेत्र को इसके दायरे में लाया गया है। नमामि गंगे क्षेत्र में प्राकृतिक खेती के विस्तार, किसानों के प्रशिक्षण तथा सफल मॉडलों के प्रचार-प्रसार से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।

श्री चौहान ने कहा कि प्राकृतिक खेती के सफल मॉडलों को अधिकाधिक किसानों तक पहुंचाने के लिए मॉडल फार्मों का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि किसानों के लिए नियमित अध्ययन भ्रमण आयोजित हों ताकि वे प्राकृतिक खेती के सफल उदाहरणों को प्रत्यक्ष रूप से देख सकें और उनसे सीख सकें। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विश्वविद्यालयों तथा अन्य संस्थानों द्वारा विकसित मॉडल फार्मों को ज्ञान एवं प्रशिक्षण केंद्रों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

इस दौरान प्राकृतिक खेती के लिए प्रस्तावित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना से संबंधित प्रगति की भी समीक्षा की गई। श्री चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना से संबंधित प्रक्रियाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए ताकि अनुसंधान, नवाचार, क्षमता निर्माण तथा तकनीकी सहयोग को और अधिक गति मिल सके।

बैठक में प्राकृतिक खेती के अंतर्गत अब तक हुई प्रगति, राज्यों में चल रही गतिविधियों, किसानों की भागीदारी तथा मिशन के आगामी लक्ष्यों पर प्रस्तुति दी गई। प्रस्तुति में बताया गया कि वर्तमान में देशभर में 24 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं तथा राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के अंतर्गत वर्ष 2030 तक 85 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में मिशन के आगामी चरणों में प्राकृतिक खेती के विस्तार को और गति देने की आवश्यकता पर बल दिया गया। समीक्षा बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री अतिश चंद्र सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा अन्य संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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