
श्री संगमा मेघालय के एक सुविख्यात सांसद, प्रशासक और नेता थे जिन्होंने सार्वजनिक जीवन और पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्ष 1977 में संसद में प्रवेश करने के बाद उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में केन्द्रीय मंत्री और मेघालय के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। वर्ष 1996 में उन्हें सर्वसम्मति से 11वीं लोक सभा के अध्यक्ष पद के लिए चुना गया और वह विपक्ष के पहले ऐसे सदस्य बने जिन्होंने इस कार्यभार को संभाला। अध्यक्ष के रूप में, संसदीय नियमों के ज्ञान, सदन की गरिमा एवं सुचारू संचालन के प्रति प्रतिबद्धता, और संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने के प्रयासों के लिए उनका व्यापक रूप से सम्मान किया जाता था। उन्होंने विधानमंडलों में महिलाओं के अधिक प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने और अंतर-संसदीय संबंधों को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्री संगमा नौ बार लोक सभा के सदस्य रहे और पूर्वोत्तर क्षेत्र, विशेष रूप से जनजातीय और वंचित समुदायों के उत्थान से गहराई से जुड़े रहे । श्रमिक वर्ग तथा उपेक्षित वर्गों के कल्याण में उनके योगदान के लिए उनकी व्यापक रूप से सराहना की गई। श्री संगमा का निधन चार मार्च 2016 को नई दिल्ली में हुआ।
