भोपाल:भोपाल मेट्रो को साल 2018 में मंजूरी मिली थी, लेकिन यात्री सेवा शुरू होने में करीब 7 साल का समय लगा। टेंडर प्रक्रिया, जमीन से जुड़े काम, यूटिलिटी शिफ्टिंग और तकनीकी प्रक्रियाओं के चलते प्रोजेक्ट में देरी हुई। दिसंबर 2025 में AIIMS से सुभाष नगर तक 7 किलोमीटर के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर यात्री सेवा शुरू हुई। इस रूट पर 8 स्टेशन हैं और फिलहाल दोनों ट्रैक पर मेट्रो का संचालन हो रहा है।
भोपाल मेट्रो की मूल परियोजना में करोंद से AIIMS और भदभदा से रत्नागिरी तिराहा कॉरिडोर शामिल हैं। इनकी कुल लंबाई करीब 27.87 किलोमीटर है, जिसमें 25.46 किलोमीटर एलिवेटेड और 3.39 किलोमीटर अंडरग्राउंड सेक्शन है। पुराने भोपाल के हिस्से में अंडरग्राउंड सेक्शन पर काम जारी है, जिसमें भोपाल जंक्शन और नादरा बस स्टैंड स्टेशन शामिल होंगे। वहीं भदभदा से रत्नागिरी तिराहे तक 12.9 किलोमीटर की ब्लू लाइन पर भी निर्माण जारी है।
फरवरी 2026 तक पूरे प्रोजेक्ट का करीब 55 प्रतिशत फिजिकल वर्क पूरा हो चुका था, जबकि करीब 45 प्रतिशत काम अभी बाकी है। सरकार का लक्ष्य 2028 तक पूरे प्रोजेक्ट को पूरा करना है।
हमारी Ground Report में हमने एक्सपर्ट और भोपाल के लोगों से बात कर 2028 की डेडलाइन और मेट्रो के काम की रफ्तार को लेकर उनकी राय जानी। एक्सपर्ट और लोगों का मानना है कि मौजूदा रफ्तार को देखते हुए 2028 तक पूरा प्रोजेक्ट तैयार होना मुश्किल नजर आता है। अब देखना होगा कि आने वाले समय में निर्माण कार्य की रफ्तार कितनी बढ़ती है और भोपाल का पूरा मेट्रो नेटवर्क कब तैयार होता है।
