17 साल बाद एक ही दिन हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का संयोग

नीमच। इस वर्ष धार्मिक दृष्टि से विशेष संयोग बनने जा रहा है। 14 सितंबर 2026, सोमवार को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का पर्व एक ही दिन मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और पारिवारिक सुख-समृद्धि की कामना से निर्जला हरतालिका तीज व्रत रखेंगी, वहीं मध्यान्ह में प्रथम पूज्य भगवान गणेश की स्थापना के साथ गणेशोत्सव का शुभारंभ होगा। उपलब्ध पंचांग गणनाओं के अनुसार 14 सितंबर को चतुर्थी तिथि सुबह करीब 7.06 बजे से प्रारंभ होगी और 15 सितंबर की सुबह तक रहेगी।

पंडित शैलेन्द्र उपाध्याय के अनुसार इस बार तिथियों की स्थिति के कारण दोनों पर्वों का यह विशेष संयोग बन रहा है। हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया पर मनाई जाती है और 2026 में इसकी तिथि भी 14 सितंबर है। तृतीया 13 सितंबर की सुबह शुरू होकर 14 सितंबर की सुबह समाप्त होगी, जबकि इसके बाद चतुर्थी प्रारंभ हो जाएगी।

बालू से बनाए जाएंगे शिव-पार्वती –

हरतालिका तीज के अवसर पर सुहागिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की बालू अथवा मिट्टी से प्रतिमाएं बनाकर उनका पूजन करेंगी। अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से महिलाएं निर्जला व्रत रखेंगी। पूजा के दौरान हरतालिका तीज की कथा का श्रवण किया जाएगा तथा कई स्थानों पर रात्रि जागरण भी होगा। हरतालिका तीज पर शिव-पार्वती की बालू या मिट्टी की प्रतिमाएं बनाकर पूजा करने की परंपरा का भी उल्लेख मिलता है।

मध्यान्ह में गणेश स्थापना का विशेष महत्व –

14 सितंबर को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि रहेगी, जबकि सुबह चतुर्थी प्रारंभ होने के बाद मध्यान्ह में भगवान गणेश की स्थापना और पूजन किया जाएगा। गणेश चतुर्थी के लिए मध्यान्ह काल को विशेष महत्व दिया जाता है। मध्यप्रदेश के विभिन्न पंचांगों में भी इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को ही दर्शाई गई है।

इस संयोग के चलते इस बार घरों, मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की स्थापना के साथ ही हरतालिका तीज का धार्मिक उत्सव भी रहेगा। यानी एक ही दिन शिव-पार्वती की आराधना और प्रथम पूज्य भगवान गणेश की स्थापना का अवसर मिलेगा।

12 दिन का होगा गणेशोत्सव –

इस बार तिथियों की स्थिति के कारण गणेशोत्सव सामान्य 10 दिनों के बजाय 12 दिनों तक चलने का संयोग बन रहा है। 14 सितंबर को गणेश स्थापना के बाद 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर गणेश विसर्जन होगा। उपलब्ध पंचांग गणनाओं में भी 25 सितंबर को गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी बताई गई है।

इस दौरान शहर सहित जिलेभर में गणेश पंडाल सजेंगे। घरों में भी श्रद्धालु विधि-विधान से गणपति की स्थापना कर प्रतिदिन पूजा-अर्चना, आरती और धार्मिक आयोजन करेंगे। अनंत चतुर्दशी पर श्रद्धालु भगवान गणेश को विदाई देंगे।

धार्मिक दृष्टि से खास रहेगा सोमवार –

इस वर्ष 14 सितंबर को सोमवार होने से भी पर्व का धार्मिक महत्व बढ़ गया है। सोमवार भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। ऐसे में एक ओर महिलाएं हरतालिका तीज पर शिव-पार्वती की पूजा करेंगी, वहीं दूसरी ओर इसी दिन गणेश चतुर्थी होने से भगवान गणेश की आराधना भी होगी।

ज्योतिष एवं पंचांग परंपरा के अनुसार तिथियां सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के आधार पर निर्धारित होती हैं और प्रत्येक तिथि की अवधि समान नहीं होती। इसी कारण कई बार दो धार्मिक पर्वों की तिथियां एक-दूसरे से जुड़ जाती हैं। इस वर्ष भी तृतीया और चतुर्थी की स्थिति के कारण हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का पर्व एक ही दिन पड़ रहा है।

इस तरह 14 सितंबर का दिन नीमच – मंदसौर सहित देशभर में श्रद्धा और आस्था के लिहाज से विशेष रहेगा—सुबह हरतालिका तीज का निर्जला व्रत और शिव-पार्वती पूजन, जबकि मध्यान्ह में प्रथम पूज्य भगवान गणेश की स्थापना के साथ गणेशोत्सव का शुभारंभ होगा।

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