अमेरिकी न्यायाधीश ने 9/11 वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हमले के कथित सरगना खालिद शेख मोहम्मद का कबूलनामा खारिज किया

न्यूयॉर्क, 29 अगस्त (वार्ता) अमेरिकी सैन्य अदालत ने फैसला सुनाया है कि 11 सितंबर के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हमलों के कथित सरगना खालिद शेख मोहम्मद ने 2007 में संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) एजेंटों के सामने जो कबूलनामे दिए थे, उन्हें मुकदमे में सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है क्योंकि ये बयान अपनी मर्ज़ी से नहीं दिए गए थे।

यह फैसला अमेरिकी सरकार की उस लंबी कोशिश के लिए एक झटका है जिसके तहत मोहम्मद (जिसे केएसएम के नाम से भी जाना जाता है) पर मुकदमा चलाया जा रहा है। उस पर चार वाणिज्यिक विमानों को हाईजैक करने और उन्हें वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन से टकराने की साज़िश रचने और उसे अंजाम देने में मदद करने का आरोप है।

गौरतलब है कि 11 सितंबर, 2001 के हमलों में लगभग 3,000 लोग मारे गए थे। सैन्य अदालत के न्यायाधीश लेफ्टिनेंट कर्नल माइकल श्रमा ने फैसला सुनाया कि जनवरी 2007 में ग्वांतानामो बे में चार दिनों की पूछताछ के दौरान मोहम्मद ने जो बयान दिए थे, उन्हें उसके खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत का आदेश सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया गया था, लेकिन जिन वकीलों ने फैसला देखा था, उन्होंने इसकी गैर-गोपनीय जानकारी की पुष्टि की। श्रमा ने पाया कि केंद्रीय खुफिया एजेंसी (सीआईए) द्वारा मोहम्मद के साथ पहले किए गए बर्ताव का उस पर लगातार मनोवैज्ञानिक असर पड़ा था और उसे यह डर पैदा हो गया था कि अगर उसने पूछताछ करने वालों का सहयोग नहीं किया तो उसके साथ बहुत बुरा बर्ताव किया जाएगा। मोहम्मद को मार्च 2003 में पाकिस्तान में पकड़ा गया था और बाद में सीआईए ने उसे विदेश में गुप्त हिरासत केंद्रों में रखा था, जहाँ उस पर वॉटरबोर्डिंग और पूछताछ के अन्य कठोर तरीके अपनाए गए थे। उसे सितंबर 2006 में ग्वांतानामो बे भेज दिया गया था।

मोहम्मद को सितंबर 2006 से क्यूबा के ग्वांतानामो बे में रखा गया है जहां उसके साथ कई अन्य आरोपी भी हैं जिनकी सुनवाई होनी बाकी है। न्यायाधीश श्रमा ने इस हफ्ते की शुरुआत में मोहम्मद और तीन अन्य आरोपियों के सुनवाई के लिए जून 2028 की तारीख तय की।

शुक्रवार को जारी अदालत के एक आदेश में ( जिसे अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है) न्यायाधीश श्रमा ने उन बयानों को खारिज कर दिया जो मोहम्मद ने जनवरी 2007 में ग्वांतानामो बे में चार दिनों की पूछताछ के दौरान एफबीआई एजेंटों को दिए थे।

‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार न्यायाधीश श्रमा ने लिखा, “अभियोजन पक्ष सबूतों के आधार पर यह साबित करने में विफल रहा है कि एफबीआई को दिए गये मोहम्मद के बयान स्वेच्छा से दिए गए थे।”

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी सैन्य आयोग मोहम्मद और 9/11 की साजिश रचने के आरोपी तीन अन्य लोगों के लंबे समय से रुकी हुई सुनवाई की तैयारी कर रहा है। सुनवाई पांच जून, 2028 को क्यूबा के ग्वांतानामो बे में अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर शुरू होने होगी । अभियोजन पक्ष को पहले ही उन बयानों का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है जो मोहम्मद ने पकड़े जाने के बाद सीआईए की हिरासत में रहने और कड़ी पूछताछ का सामना करने के दौरान दिए थे।

मोहम्मद को पहले सीआईए ने पकड़ा था और हिरासत में रखा था, जहाँ उसे वॉटरबोर्डिंग और पूछताछ की अन्य तकनीकों का सामना करना पड़ा था, जिन्हें व्यापक रूप से टॉर्चर माना जाता है। बाद में उसके वकीलों ने एफबीआई की एक अलग टीम को दिए गए उसके बयानों को चुनौती दी और तर्क दिया कि उसके साथ पहले किए गए व्यवहार ने बाद में उसके द्वारा किए गए कबूलनामे की स्वेच्छा को प्रभावित किया था।

न्यायाधीश श्रमा ने कहा कि सीआईए के व्यवहार ने मोहम्मद के मन में यह डर पैदा कर दिया था कि अगर उसने पूछताछ करने वालों के साथ सहयोग करने से इनकार किया तो उसे बहुत बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ेगा। जज ने यह भी पाया कि मोहम्मद को ‘मिरांडा वॉर्निंग’ नहीं दी गई थी, जिसमें उसे चुप रहने के अधिकार के बारे में बताया जाता है, और उसे यह भी बताया गया था कि वह वकील से बात नहीं कर सकता। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इस बात की फिर से जांच हो रही है कि 11 सितंबर, 2001 से पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को मोहम्मद और नियोजित हमलों के बारे में क्या जानकारी थी।

न्यूज़वीक की एक रिपोर्ट के अनुसार, हमलों से कुछ हफ़्ते पहले सीआईए के आतंकवाद-रोधी केंद्र को ऐसी खुफिया जानकारी मिली थी जिससे पता चलता था कि “मुख्तार” उपनाम खालिद शेख मोहम्मद से जुड़ा था। बताया जाता है कि उस साल की शुरुआत में सीआईए की रिपोर्टिंग में यह नाम कई बार सामने आया था। खुफिया जानकारी में “मुख्तार” का वर्णन ऐसे व्यक्ति के रूप में किया गया था जो अमेरिका के खिलाफ हमलों के लिए आतंकवादियों की भर्ती और उन्हें प्रशिक्षित कर रहा था। हालाँकि, रिपोर्ट के अनुसार, सीआईए हमलों को रोकने के लिए समय रहते “मुख्तार” की पहचान मोहम्मद से जोड़ने वाली जानकारी का मिलान करने में विफल रही।

मोहम्मद के बारे में अमेरिकी अधिकारियों को पहले से ही जानकारी थी। 1993 में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए बम धमाके में कथित भूमिका के लिए जनवरी 1996 में उस पर आरोप लगाए गये थे। कतर में उसे पकड़ने की असफल कोशिश के बाद, मोहम्मद उसी साल बाद में देश छोड़कर चला गया और बाद में अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान में समय बिताया, जहाँ वह अल-कायदा से जुड़ गया और समूह को मीडिया से संबंधित सहायता प्रदान की।

मामले के अभियोजक, रियर एडमिरल आरोन सी. रूघ ने ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ को बताया कि सरकार निकट भविष्य में अपील करने या न करने पर निर्णय लेगी। वर्ष 2007 में मोहम्मद से पूछताछ करने वाले सेवानिवृत्त एफबीआई के एजेंट फ्रैंक पेलेग्रिनो ने सीबीएस न्यूज़ को बताया कि उनका मानना है कि मोहम्मद ने 11 सितंबर के हमलों में अपनी भूमिका की बात स्वेच्छा से स्वीकार की थी।

 

 

 

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