
नीमच। रक्षाबंधन के अवसर पर नीमच जिले के ग्राम कुंचड़ोद निवासी चित्रकार राहुल कुमार लोहार ने कला, आस्था और भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम प्रस्तुत करते हुए ‘रुद्राक्ष शिव-राखी’ तैयार की है। इस विशेष राखी में 13 रुद्राक्षों का उपयोग किया गया है। इनमें 12 रुद्राक्षों पर भारत के द्वादश ज्योतिर्लिंगों के अति सूक्ष्म चित्र उकेरे गए हैं, जबकि बीच में रखे 13वें रुद्राक्ष पर मंदसौर के प्रसिद्ध अष्टमुखी पशुपतिनाथ महादेव का चित्र बनाया गया है।
राहुल ने रुद्राक्ष की छोटी और प्राकृतिक सतह को ही अपना कैनवास बनाया। उन्होंने प्रत्येक रुद्राक्ष पर एक-एक ज्योतिर्लिंग का स्वरूप उकेरने के लिए एक या दो बाल वाले बारीक ब्रश का इस्तेमाल किया। कलाकार के अनुसार इस सूक्ष्म चित्रकारी के दौरान उन्होंने किसी मैग्नीफाइंग ग्लास या लेंस की सहायता नहीं ली, बल्कि नग्न आंखों से ही चित्र तैयार किए।
12 ज्योतिर्लिंगों को एक सूत्र में जोड़ा
राखी में सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम और घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंगों को स्थान दिया गया है। इन 12 रुद्राक्षों को गोलाकार रूप में एक-दूसरे से जोडक़र राखी का स्वरूप दिया गया है। इनके ठीक मध्य में 13वें रुद्राक्ष पर मंदसौर के अष्टमुखी पशुपतिनाथ महादेव को स्थान दिया गया है।
कलाकार का कहना है कि इस कलाकृति के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थापित द्वादश ज्योतिर्लिंगों को एक ही सूत्र में जोडऩे का प्रयास किया गया है। साथ ही मध्य में पशुपतिनाथ महादेव को स्थान देकर भारतीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक एकता का संदेश देने की कोशिश की गई है।
राहुल लोहार के अनुसार इस कलाकृति की सबसे बड़ी विशेषता 13 रुद्राक्षों की संरचना, अत्यंत सूक्ष्म मिनिएचर चित्रकारी और बिना किसी लेंस के नग्न आंखों से किया गया चित्रांकन है। रक्षाबंधन पर तैयार यह अनोखी शिव-राखी कला और आस्था के अनूठे मेल के रूप में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
