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इंदौर। शहर में दूषित पानी से मौतों के मामले में जांच कमेटी रिपोर्ट में आज कुछ तथ्य सामने आए हैं । कमेटी रिपोर्ट में अधिकारियों को दोषी बताया गया है और पार्षद से लेकर महापौर तक किसी नेता को मामले में दोषी नहीं माना गया है। खास बात यह है कि दाेनों पूर्व निगम आयुक्त को भी क्लीन चिट दी गई है।
शहर के भागीरथपुरा में गंदे पानी की वजह से 38 लोगों की मौत हो गई थी। उक्त मामले में हाईकोर्ट के निर्देश पर सेवानिवृत्त जस्टिस सतीश गुप्ता की एक सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई थी। कमेटी को एक महीने में जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपनी थी, लेकिन निगम अधिकारियों और परिषद का रवैया सकारात्मक नहीं होने से रिपोर्ट तीन महीने बाद एक हफ्ते पहले हाईकोर्ट में जमा कराई गई। उक्त मामले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर रोक लगाई गई है।
मामले को लेकर हाईकोर्ट बार एसोशिएशन के अध्यक्ष ने प्रिंसिपल रजिस्ट्रार के यहां आवेदन देकर रिपोर्ट देखने और उसकी कॉपी देने और देखने का आवेदन किया था। उसी आधार में भागीरथपुरा की रिपोर्ट के कुछ तथ्य सामने आए है।
बताया जा रहा है कि उक्त जांच रिपोर्ट में कमेटी ने भागीरथपुरा में पाइप लाइन डालने में देरी का अधिकारियों को दोषी माना है। रिपोर्ट में बार बार पूर्व कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव के द्वारा पाइप लाइन बदलने के काम में लापरवाही करने की बात सामने आई है। साथ ही पाइप लाइन के टेंडर में देरी करने की गलती भी अधिकारियों की बताई गई है।
उक्त पूरे मामले में जांच कमेटी ने नर्मदा कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव, अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया, पूर्व अपर आयुक्त संदीप सोनी को दूषित पानी और 36 मौतों का दोषी बताया गया है।
वहीं रिपोर्ट में पार्षद कमल वाघेला, एमआईसी सदस्य अभिषेक शर्मा और महापौर पुष्यमित्र भार्गव को क्लीन चिट दी गई है।
सहायता राशि बढ़ाएं
हाईकोर्ट बार एसोशिएशन के अध्यक्ष मनीष यादव ने रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर रोक के चलते सिर्फ इतना कहा है कि मृतकों के परिजन को सहायता राशि 2 लाख से बढ़ाकर 4 लाख या 20 लाख रुपए तक दी जाना चाहिए। अधिवक्ता यादव ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारी ,आयएएस और जनप्रतिनिधियों को भागीरथपुरा कांड में दोषी नहीं माना गया है। वरिष्ठ अधिकारी कांड के समय निगम आयुक्त दिलीप यादव और पूर्व निगम आयुक्त एवं वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा को क्लीन चिट मिलने की चर्चा है।
मामले में वकीलों ने फिर से दायर की इंटरविनर याचिका
उक्त मामले की रिपोर्ट देखने के बाद हाईकोर्ट बार एसोशिएशन के अध्यक्ष मनीष यादव ने कोर्ट में प्रमोद द्विवेदी और महेश गर्ग की इंटर विनर याचिका दायर की है। इसके अलावा अधिवक्ता रितेश ईनाणी ने उक्त मामले में अलग याचिका दायर की है। उपरोक्त अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट में भागीरथपुरा कांड के लिए इंटर विनर याचिकाओं की अलग से सुनवाई की मांग की है। साथ ही वकीलों ने कहा है कि मामले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएं और इंटर विनर याचिका की लाइव स्ट्रीमिंग की जाएं। एक चर्चा यह भी है कि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा भी उक्त मामले में हाईकोर्ट से जांच रिपोर्ट के बाद सुनवाई में शामिल हो सकते है।
