उपराष्ट्रपति रविवार को ओणम के समापन जुलूस को हरी झंडी दिखाएंगे

तिरुवनंतपुरम, 29 अगस्त (वार्ता) उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन रविवार शाम 5 बजे लोक भवन से ओणम पर्यटन सप्ताह समारोह के भव्य समापन जुलूस को हरी झंडी दिखाएंगे, जिससे केरल की समृद्ध सांस्कृतिक और कलात्मक परंपराओं को प्रदर्शित करने वाला पूरे सप्ताह चलने वाला उत्सव संपन्न हो जायेगा।

यह जुलूस वेल्लायम्बलम, म्यूजियम, पलायम और स्टैच्यू से होते हुए ईस्ट फोर्ट पर समाप्त होगा। इसमें विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा तैयार की गई लगभग 69 झांकियां और इंस्टॉलेशन शामिल होंगे। ये प्रदर्शन केरल की सामाजिक प्रगति, परंपराओं, संस्कृति और सामाजिक रूप से प्रासंगिक मुद्दों को उजागर करेंगे।

इस भव्य आयोजन में विभिन्न सांस्कृतिक पहचानों का प्रतिनिधित्व करने वाली लगभग 99 कला शैलियां शामिल होंगी। पुलिकली, गरुड़ परावे और मुथप्पन थेय्यम जैसी पारंपरिक केरल कला शैलियां मुख्य आकर्षण होंगी, जबकि तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना के प्रदर्शन जुलूस में विविधता जोड़ेंगे। गौरतलब है कि इसमें ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों के प्रदर्शन भी शामिल होंगे।

केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, मुख्यमंत्री वीडी सतीसन, पर्यटन मंत्री पीसी विष्णुनाथ, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और देवस्वोम मंत्री के. मुरलीधरन और परिवहन मंत्री सीपी जॉन इस उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे।

इस उत्सव में कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिससे विभिन्न शैलियों का प्रतिनिधित्व करने वाले सैकड़ों कलाकारों को अपनी कला दिखाने का मौका मिला। सरकार से जुड़े लगभग 14 प्रमुख मीडिया संगठनों ने पूरे सप्ताह चलने वाले इस उत्सव के दौरान निशागांधी, सेंट्रल स्टेडियम और पूजापुरा में कार्यक्रम आयोजित किए।

जुलूस के कारण रविवार को तिरुवनंतपुरम शहर में यातायात प्रतिबंध लागू रहेंगे। राज्य पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित इस उत्सव में राज्यभर के विभिन्न स्थानों पर केरल की शास्त्रीय, लोक, पारंपरिक और अनुष्ठानिक कला परंपराओं को प्रदर्शित किया गया, जिससे पर्यटक और स्थानीय दर्शक आकर्षित हुए। तिरुवनंतपुरम जिले के 35 स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में 3,000 से अधिक कलाकारों ने भाग लिया, जिनमें कनकक्कुन्नु और सेंट्रल स्टेडियम जैसे प्रमुख स्थान शामिल थे।

उत्सव के दौरान निशागांधी में केरल की पारंपरिक रस्मों से जुड़ी कलाओं-जैसे पदायानी, थेय्यम, मुडियेट्टू, शैडो पपेट्री, अर्जुन नृत्यम और थिरा को पेश किया गया। पूरे राज्य में लगभग 100 जगहों पर करीब 170 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 8,000 से अधिक कलाकारों ने हिस्सा लिया।

 

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