
कटनी। जिले में जर्जर सड़कें अब केवल शहर की समस्या नहीं रह गई हैं। नगर निगम सीमा के चाका से झिंझरी तक उखड़ी मुख्य सड़क हो या जिले के बहोरीबंद, रीठी, बड़वारा, ढीमरखेड़ा और विजयराघवगढ़ क्षेत्र के ग्रामीण मार्ग, खराब सड़कों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। हालत यह है कि जिले के अलग-अलग हिस्सों से जर्जर सड़कों की खबरें आए दिन अखबारों की सुर्खियां बन रही हैं। बारिश ने समस्या को और गंभीर कर दिया है। जगह-जगह बने गड्डों में पानी भरने से सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देती और वाहन चालकों को हर कदम संभलकर चलना पड़ रहा है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों और ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन करने वाले लोगों के सामने दुर्घटना का खतरा लगातार बना हुआ है।
चाका से झिंझरी तक सीवर के बाद उखड़ी सड़क
नगर निगम सीमा में चाका से झिंझरी तक मुख्य सड़क की स्थिति कई स्थानों पर बेहद खराब हो चुकी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सीवर लाइन बिछाने के कार्य के बाद सड़कें उखड़ गईं और अब उनकी स्थायी मरम्मत नहीं हो सकी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब सीवर लाइन का कार्य प्रस्तावित था तो पहले सड़क निर्माण क्यों कराया गया। निर्माण के बाद सड़क खोदने और फिर उसे गुणवत्तापूर्ण तरीके से बहाल नहीं किए जाने को लेकर कार्यों की योजना और गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे है हैं।
हर रोज सुर्खियों में ग्रामीण सड़कों की बदहाली
बहोरीबंद, रीठी, बड़वारा, ढीमरखेड़ा और विजयराघवगढ़ क्षेत्रों से भी जर्जर सड़कों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। कहीं सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है तो कहीं बड़े-बड़े गड्ढे आवागमन में बाधा बन गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बारिश के दिनों में सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गड्डों में पानी भरने के कारण सड़क और गड्डे के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में वाहन अनियंत्रित होने और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
आंदोलन के बाद भी मरम्मत का इंतजार
जर्जर सड़कों को लेकर राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों द्वारा लगातार आवाज उठाई जा रही है। कई क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन और आंदोलन भी हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद अनेक सड़कों की स्थायी मरम्मत का इंतजार बना हुआ है। लोगों का कहना है कि केवल अस्थायी मरम्मत या गड्डों में मलबा डालने से समस्या का समाधान नहीं होगा। बारिश के बाद सड़कें फिर उखड़ जाती हैं और करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन नहीं मिल पाता।
शहर के वार्डों में भी कम नहीं परेशानी
मुख्य सड़कों के साथ नगर निगम क्षेत्र के कई वाडों में भी सड़कें उखड़ने लगी हैं। बारिश में जलभराव के कारण गड्ढे और गहरे होते जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर की आंतरिक सड़कों की स्थिति का भी सर्वे कराकर प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत की जानी चाहिए। सवाल यह है कि आखिर जिले की सड़कों की जिम्मेदारी कौन लेगा? शहर से लेकर गांव तक जर्जर मार्गों की खबरें लगातार सुर्खियां बन रही हैं और लोग सड़क मरम्मत की मांग कर रहे हैं। अब जरूरत केवल शिकायतों और आश्वासनों की नहीं, बल्कि जिलेभर की खराब सड़कों के सर्वे और समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण मरम्मत की है।
