अमेरिका की यात्रा पर पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में ऐतिहासिक इस्कॉन केंद्रों का दौरा किया। इस्कॉन की स्थापना के 60वें वर्ष के अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि आज के दौर में बढ़ते वैश्विक संघर्षों और आपसी द्वंद्वों के बीच केवल साझा कृष्ण चेतना ही संपूर्ण मानवता को एकजुट कर सकती है।
कर्तव्य पालन और भगवद गीता का सार
आरएसएस प्रमुख ने गीता के व्यावहारिक संदेश को समझाते हुए स्पष्ट किया कि भगवद गीता कभी भी जीवन या जिम्मेदारियों से भागने की सीख नहीं देती। उन्होंने कहा कि इंसान को दुनिया से दूर भागने के बजाय पूरी मजबूती के साथ डटे रहकर अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए, क्योंकि हर जगह वही परम शक्ति व्याप्त है।
ऐतिहासिक मैनहट्टन यात्रा और वैश्विक नेटवर्क
अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने मैनहट्टन स्थित ’26 सेकेंड एवेन्यू’ का भी दौरा किया, जो 1966 में स्वामी प्रभुपाद द्वारा इस्कॉन की स्थापना का ऐतिहासिक स्थल है। उन्होंने दुनिया भर में 120 से अधिक देशों में फैले इस्कॉन के विशाल नेटवर्क और 80 से अधिक भाषाओं में भगवद गीता की 60 करोड़ प्रतियां वितरित करने की इस महान उपलब्धि की भूरी-भूरी प्रशंसा की।

