रक्षाबंधन आत्मा को बंधनों से मुक्ति की ओर ले जाने का संदेश : आचार्य श्री

भोपाल। रक्षाबंधन केवल सांसारिक रिश्तों में प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक नहीं, बल्कि जैन दर्शन में आत्मा को बंधनों से मुक्ति की ओर ले जाने और प्रत्येक भव्य आत्मा के प्रति वात्सल्य रखने का संदेश देता है। शुक्रवार को श्रेयांसनाथ भगवान के निर्वाण एवं वात्सल्य महापर्व पर आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री ने कहा कि धर्म केवल परिभाषा नहीं, बल्कि प्रयोग और अनुभव का विषय है। मोक्षमार्ग को चर्मचक्षुओं से नहीं, दृढ़ श्रद्धा से अनुभव किया जा सकता है। जिनवाणी, देव और गुरु के प्रति आस्था रखते हुए आत्मिक परिवर्तन जरूरी है। उन्होंने कहा कि विष्णुकुमार मुनिराज ने 700 मुनियों की रक्षा कर सच्चे वात्सल्य का उदाहरण प्रस्तुत किया। भटके व्यक्ति को तर्क से नहीं, प्रेम और करुणा से धर्ममार्ग पर लाना ही वास्तविक वात्सल्य है। दूसरों के कल्याण की भावना रखना ही धर्मध्यान है। मीडिया प्रभारी भविष्य जैन ने यह जानकारी दी।

 

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