जबलपुर: शहर की सड़कों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। मुख्य मार्गों से लेकर गली-मोहल्लों तक मवेशी सड़क के बीचों-बीच बैठे और घूमते नजर आते हैं। इसके चलते वाहन चालकों को हर समय संभलकर गुजरना पड़ता है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति अधिक परेशानी वाली है। मवेशियों को बचाने के प्रयास में अचानक वाहन मोड़ने या ब्रेक लगाने से टक्कर की आशंका बनी रहती है। बारिश के दौरान सड़कें फिसलन भरी होने से खतरा और बढ़ जाता है। रात के समय बिना पर्याप्त रोशनी वाले मार्गों पर सड़क पर बैठे मवेशी दूर से दिखाई नहीं देते और ऐसे में तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक आने पर बड़ा हादसा हो सकता है।
सड़कों पर भिड़ रहे मवेशी
समस्या सिर्फ सड़क पर मवेशियों के बैठने तक सीमित नहीं है। कई स्थानों पर आवारा मवेशी सड़क के बीच आपस में लड़ते हुए दिखाई देते हैं। लड़ते-लड़ते जब ये पशु अचानक दौड़ते हैं तो आसपास से निकल रहे वाहन चालक घबरा जाते हैं। कई बार मवेशी वाहनों के बिल्कुल सामने पहुंच जाते हैं और चालक को तत्काल ब्रेक लगाना पड़ता है। वहीं, हॉर्न या वाहनों की आवाज से घबराकर मवेशियों के अचानक इधर-उधर भागने से भी यातायात प्रभावित होता है। भीड़भाड़ वाले मार्गों पर यह स्थिति और गंभीर हो जाती है, जहां वाहन चालकों के साथ पैदल राहगीरों को भी मवेशियों से बचकर निकलना पड़ता है।
जिम्मेदारों की कार्रवाई का इंतजार
आवारा मवेशियों को लेकर लगातार शिकायतों के बावजूद सड़कों पर स्थिति में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा है। नागरिकों का कहना है कि महज कभी-कभार अभियान चलाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। मवेशियों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ पशु मालिकों की जिम्मेदारी तय करने और दोबारा सड़कों पर मवेशी छोड़ने वालों पर कार्रवाई की जरूरत है। शहरवासियों का कहना है कि किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय समय रहते व्यवस्था दुरुस्त की जाए, क्योंकि सड़क पर बैठे और आपस में लड़ते आवारा मवेशी कभी भी वाहन चालकों और राहगीरों की जान पर भारी पड़ सकते हैं।
